लखनऊ: हिंदू नववर्ष का शुभारंभ शक्ति आराधना के साथ होता है। नौ दिन तक देश के सभी शक्तिपीठों में अनुष्ठान चलते है। इन सभी स्थलों पर श्रद्धुओं का सैलाब उमड़ता है। यह आध्यात्मिक चेतना का अवसर है। नवरात्रि शक्ति आराधना का आध्यात्मिक पर्व है। इस समय प्रकृति में विविध रंग होते है। मां दुर्गा के इस पावन पर्व में रंगों का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि में नौ दिन दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी के इन रूपों की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।पूर्णागिरी धाम को 108 सिद्ध पीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर सती माता की नाभि गिरी थी। यह धाम उत्तराखंड के चंपावत जनपद में शारदा नदी के पास स्थित है।यह धाम मल्लिकागिरी, कालिकागिरी और हमला चोटियों से घिरा है। पूर्णागिरी मंदिर। मंदिर तक पहुंचने के लिए पर्वत के शिखर तक करीब तीन किलोमीटर की यात्रा करनी होती है। यात्रा के प्रारंभ में भैरों बाबा का भी मंदिर है। श्रद्धालु यहां भी दर्शन पूजन करते हैं। मंदिर के पास से ही शारदा नदी और नेपाल की पहाड़ियों का मनोरम दृश्य दिखता है।1632 ईस्वी में गुजरात के व्यापारी चंद्र तिवारी चंपावत के राजा ज्ञानचंद के यहाँ शरण लिए थे। एक रात मां पूर्णागिरी ने उनके स्वप्न में दर्शन दिए और मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इस दिव्य प्रेरणा से मंदिर का निर्माण हुआ।