विश्व शान्ति के लिए भारत को इजराइल बनाम इरान के बीच चल रहे युद्ध को स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर युद्ध को रुकवाने की पहल करनी चाहिए। – राष्ट्रीय नागरिक पार्टी

कृष्ण कुमार गौतम:राष्ट्रीय नागरिक पार्टी, अध्यक्ष, कृष्ण कुमार गौतम ने भारत की राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि विश्व शान्ति के लिए भारत को इजराइल बनाम ईरान के बीच चल रहे युद्ध को स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर युद्ध को रुकवाने के लिए पहल करनी चाहिए। विश्व के विकसित और अविकसित राष्ट्र भारत को विश्व शान्ति, करूणा, मैत्री भाई चारे के लिए के प्रतीक के रूप में जानते हैं। भारत हमेशा से विश्व में युद्ध नही- शान्ति का पक्षधर रहा हैं।गौरतलब रहे कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध ( 1914-1918 ) और ( 1939-1945 ) 20 वीं सदी के सबसे विनाशकारी वैश्विक संघर्ष थें। प्रथम विश्व युद्ध ( एलाइड बनाम सेंट्रल पावर ) मित्र राष्ट्र ( फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, अमेरिका ) बनाम केन्द्रीय शक्तियां ( जर्मन, आस्ट्रेलिया- हंगरी आटोमान साम्राज्य ) मुख्य रूप से यूरोप में लड़ी गई खाई युद्ध था। युद्ध का कारण सैन्य गुटबाजी, साम्राज्यवाद और आरकडयूक फरडिनेंड की हत्या।read more:https://khabarentertainment.in/dr-suresh-kumar-mishrahawamahal/  युद्ध का परिणाम वर्साव की संधि, चार बड़े साम्राज्यों का अंत और भारी हानि ( लगभग 9 मिलियन सैनिक मारे गए ) युद्ध के उपरांत अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन संस्थापक/ प्रेरक के नेतृत्व में 41 सदस्य देशों ने 10 जनवरी, 1920 को लीग ऑफ नेशंस ( राष्ट्र संघ ) की स्थापना करने के हस्ताक्षर किए। भारत ब्रिटिश शासन के गुलाम होने के बाद भी लीग ऑफ नेशंस ( राष्ट्र संघ ) का संस्थापक सदस्य के रूप में सम्मलित रहा। जो बाद में 60 सदस्य तक संख्या पहुँच गई। लीग ऑफ नेशंस यह दुनिया का पहला अन्तरराष्ट्रीय संगठन था। जिसका मुख्य उद्देश्य विवादों को सुलझाना, सामुहिक सुरक्षा, निशस्त्रीकरण और विश्व में शान्ति बनाए रखना था। बाद में लीग ऑफ नेशंस द्वितीय विश्व युद्ध रोकने में विफल रहा और बाद में 1946 में इसे समाप्त कर दिया गया।read more:https://khabarentertainment.in/tension-between-afghanistan-and-pakistan-is-once-again-reaching-a-dangerous-point/ द्वितीय विश्व युद्ध ( 1939-1945 ) एलाइट ( ब्रिटेन, अमेरिका, सोवियत संघ, फ्रांस, चीन )बनाम ध्रुरी राष्ट्र ( जर्मन, इटली, जापान ) कारण वर्साव की संधि की कठोर शर्तें, फ़ासीवाद का उदय और जर्मन पोलैंड पर आक्रमण, इस विश्व का परिणाम 50-70 मिलियन मौते ( नागरिकों की भारी क्षति ), परमाणु युग की शुरुआत ( हिरोशिमा/ नागासाकी ) ,और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना। द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका और लीग ऑफ नेशंस की विकलता के बाद, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति, सुरक्षा और मानवाधिकार को बनाए रखने के लिए एक मजबूत और प्रभावी संगठन की आवश्यकता थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर 26 जून, 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हस्ताक्षरित संस्थापक दस्तावेज हैं। जो 24 अक्टूबर, 1945 से लागू हुआ। 51 देशों ( जिसमें भारत शामिल था ) द्वारा हस्ताक्षरित, यह विश्व को युद्ध के अभिशाप ( विशेषकर दूसरे विश्व युद्ध जैसी भयावहता ) से बचाने और अन्तरराष्ट्रीय संघर्षों को बल प्रयोग के बजाय शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाने , मानवाधिकारों की रक्षा करने, सामाजिक प्रगति और राष्ट्रों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए, सभी राष्ट्रों की संप्रभु समानता और क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करने के लिए ढांचाग तैयार करना, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा, दुनिया में स्थिरता लाने और संघर्षों को रोकने के लिए एक कानूनरूप से बाध्यकारी दस्तावेज की आवश्यकता थी। भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के संस्थापक सदस्य होने के नाते , हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती हैं कि हम इजराइल बनाम इरान के बीच चल रहे युद्ध को स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर युद्ध को रुकवाने की पहल करनी चाहिए। वर्तमान में विश्व के संप्रभु राष्ट्र भारत की ओर देख रहे हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *