अहंकार मानव के पतन का कारण : स्वामी बालभरत-रात्रिकालीन सत्र में कवियों ने बांधा समां, मंत्र मुग्ध हुए श्रोतागण 

ललितपुर। श्री सिद्धपीठ श्री तुवन सरकार मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर प्रवचन करते हुए स्वामी बालभरत जी महाराज ने कहा कि अहंकार मानव के पतन का प्रमुख कारण है। अहंकार व्यक्ति के जीवन से सकारात्मक गुणों का नाश कर देता है, इसलिए मनुष्य को सदैव विनम्रता और संयम के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि पुराणों में वर्णित हिरण्यकश्य, रावण, कंस और दुर्योधन जैसे पात्र अहंकार से ग्रसित थे। उन्होंने अपने अहंकार में ऐसे वरदान मांगे और ऐसे कर्म किए जिनके कारण अंतत: उनका विनाश हो गया। शास्त्रों में भी कहा गया है कि यदि ईश्वर किसी व्यक्ति को किसी भी क्षेत्र में प्रभुता या सफलता प्रदान करें तो उसे अहंकार से दूर रहना चाहिए। यदि जीवन में अभिमान पर नियंत्रण रखा जाए और आचरण शास्त्र सम्मत हो, तो मनुष्य का जीवन सफल और धन्य हो जाता है। कथा के दौरान स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 28 प्रकार के नरकों का वर्णन किया गया है और पाप कर्मों का फल अंतत: नरक ही होता है। इसलिए मनुष्य को हर कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार हैं। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से आदर्श और मर्यादित जीवन जीने का मार्ग दिखाया। उन्होंने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया और आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त कर आदर्श रामराज्य की स्थापना की। कथा के दौरान प्रतिदिन प्रात:काल पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है, जबकि रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम के क्रम मे कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिनमें कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। सम्पूर्ण आयोजन महंत रामलखन दास जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। यह आयोजन स्वर्गीय पवन जैन नौहर कलां की पुण्य स्मृति में नौहर कलां परिवार द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

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