वाणिज्य विभाग ने उभरते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच व्यापार निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की

नई दिल्ली वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने उभरती भू-राजनीतिक स्थिति और निर्यात इकोसिस्टम सहित भारत के निर्यात-आयात (ईएक्सआईएम) कार्गो प्रवाह पर इसके संभावित प्रभाव की समीक्षा करने के लिए सभी हितधारक मंत्रालयों, प्रमुख लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुविधा भागीदारों के साथ एक हितधारक परामर्श बैठक आयोजित किया। वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव श्री सुचिंद्र मिश्रा और विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) श्री लव अग्रवाल की अध्यक्षता में यह बैठक हुई। इस बैठक में लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और शिपिंग लाइनों/फॉरवर्डर्स, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, वित्तीय सेवा विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, निर्यात संवर्धन इकोसिस्टम और अन्य संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हितधारकों ने बदलते परिचालन परिवेश का आकलन प्रस्तुत किया, जिसमें मार्गों और पारगमन समय में बदलाव, जहाजों के शेड्यूलिंग में समायोजन, कंटेनर/उपकरणों की उपलब्धता, माल ढुलाई और बीमा लागत के रुझान और समय के प्रति संवेदनशील निर्यात पर उनके प्रभावों की जानकारी दी गई। चर्चा में कार्गो आवाजाही में पूर्वानुमान बनाए रखने, अनावश्यक विलंब को कम करने और निर्यातकों व आयातकों के लिए निर्बाध दस्तावेज़ीकरण और भुगतान प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विभाग ने आयात-निर्यात (ईएक्सआईएम) लॉजिस्टिक्स की निरंतरता सुनिश्चित करने और भारत के व्यापार प्रवाह में किसी भी व्यवधान को कम करने की भारत सरकार की प्राथमिकता को दोहराया। इस बात पर जोर दिया गया कि यह दृष्टिकोण सुगम और समन्वित बना रहेगा, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बनाए रखने, निर्यातकों – विशेष रूप से एमएसएमई के हितों की रक्षा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि घरेलू उत्पादन और उपभोग के लिए आवश्यक आयात पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। बैठक के दौरान हितधारकों के बीच मार्ग और क्षमता विकास, अधिभार और उपकरण उपलब्धता की वास्तविक समय में निगरानी के लिए निकट समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी। शीर्घ खराब होने वाले उत्पाद, औषधी तथा उच्च मूल्य के विनिर्मित निर्यात जैसे समय-संवेदी क्षेत्रों के लिए विशेष सुविधा तंत्र पर चर्चा की गई। बैठक में पत्तनों एवं अंतर्देशीय कन्टेनर डिपो पर सुविधा सुदृढ़ करने तथा भीड़भाड़ एवं अधिक समय तक माल रुकने से बचाव पर बल दिया गया।

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