ग्रामीण क्षेत्र डिजिटल ठगी के आसान और सुरक्षित लक्ष्य

वीरेंद्र बहादुर सिंह
2017 से 2023 के बीच रिटेल डिजिटल भुगतान में लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में डिजिटल भुगतान का देश की जीडीपी में योगदान लगभग 4.5 प्रतिशत था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। देश में 90 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग करने लगे हैं, जिसके कारण प्रतिदिन अरबों रुपए का आनलाइन लेन-देन हो रहा है।
2021 से अब तक साइबर अपराधों में लगभग 400 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र और छोटे शहर डिजिटल ठगी के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में साइबर सुरक्षा कमजोर होने के कारण ऐसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। पिछले पांच वर्षों में 18 लाख शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने लगभग 5500 करोड़ रुपए की ठगी रोकने का दावा किया है, लेकिन दूसरी ओर केवल 2024 में ही 23,000 करोड़ रुपए का साइबर फ्राड हो गया। इसके अलावा पिछले वर्ष भी लगभग 20,000 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज की गई।
भारत में लंबे समय से डिजिटल इंडिया मिशन चलाया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप करोड़ों लोग इंटरनेट और आनलाइन सेवाओं का उपयोग करने लगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार देश में 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और प्रतिदिन करोड़ों रुपए का डिजिटल भुगतान हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसी कारण भारत रियलटाइम पेमेंट मार्केट के रूप में तेजी से विकसित हुआ है। विशेष रूप से 2017 से 2023 के बीच रिटेल डिजिटल भुगतान में 51 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2014 में डिजिटल भुगतान का जीडीपी में 4.5 प्रतिशत योगदान था, जो इस वर्ष 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
हालाकि डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर अपराधों की संभावनाएं भी उतनी ही तेजी से बढ़ी हैं।
वर्तमान समय में साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। देश डिजिटल प्रगति का दावा कर रहा है, लेकिन इसके साथ अपराध भी बढ़ रहे हैं और डिजिटल सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। तकनीक के दुरुपयोग का स्तर इतना बढ़ गया है कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए नियंत्रण कठिन हो रहा है।
केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार 2021 से अब तक साइबर अपराधों में 400 प्रतिशत वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में साइबर सुरक्षा कमजोर होने के कारण वहां ऐसे मामलों में तेजी आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन तो हुआ है, लेकिन डिजिटल जागरूकता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में सस्ते स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के कारण डिजिटल उपयोग बढ़ा है, परंतु लोगों को डिजिटल सुरक्षा की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी कारण लोग आनलाइन गेम, सट्टेबाजी और मनोरंजन के नाम पर चल रही धोखाधड़ी में फंस जाते हैं और साइबर अपराधियों का आसान शिकार बनते हैं। पिछले दो-तीन वर्षों में आनलाइन ठगी के कारण भारतीयों को लगभग 52,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 में ही साइबर अपराधों के कारण लोगों को 19,813 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और देशभर में 21 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इससे पहले 2024 में 19 लाख मामलों में 22,849 करोड़ रुपए की ठगी हुई थी।
आज अधिकांश काम मोबाइल और इंटरनेट से होने लगे हैं। साइबर अपराधी केवल लोगों की छोटी-सी गलती का इंतजार करते हैं। लोग अनजाने में लिंक पर क्लिक कर देते हैं या निजी जानकारी साझा कर देते हैं और उनके बैंक खाते खाली हो जाते हैं। डिजिटल वित्तीय उपयोगों के बारे में जागरूकता की कमी के कारण नुकसान बढ़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया ने भी सरकारों को डिजिटल अपराध रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की सलाह दी है, लेकिन अभी तक अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण साइबर अपराध का स्तर और अधिक खतरनाक हो गया है। पहले फिशिंग ईमेल या संदेशों के माध्यम से होती थी, लेकिन अब एआई की मदद से नकली संदेश, नकली सोशल मीडिया चैट और नकली लिंक तैयार किए जा रहे हैं। लोग इन्हें वास्तविक समझ लेते हैं और ठगी का शिकार बन जाते हैं।
एआई के माध्यम से डेटा चोरी और पासवर्ड क्रैक करना भी आसान हो गया है। एआई बड़े डेटा का विश्लेषण कर पासवर्ड पैटर्न समझ सकता है, जिससे पारंपरिक पासवर्ड कमजोर साबित हो रहे हैं।
इसके अलावा एआई आधारित उन्नत मालवेयर भी बनाए जा रहे हैं, जो सुरक्षा प्रणाली के अनुसार खुद को बदल लेते हैं। ऐसे मालवेयर को सामान्य एंटीवायरस से पहचानना मुश्किल है। एआई आधारित बाट्स हजारों सिस्टम को एक साथ निशाना बना सकते हैं और सर्वर क्रैश कर सकते हैं, जिसके बाद हैकर फिरौती की मांग करते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में साइबर आर्थिक अपराधों में भारी वृद्धि हुई। उस वर्ष 36,37,288 शिकायतें दर्ज हुईं और लगभग 23,000 करोड़ रुपए की ठगी हुई।
2023 में 15,96,493 और 2022 में 10,29,026 शिकायतें दर्ज हुई थीं। पिछले तीन वर्षों में ऐसे मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।
पिछले पांच वर्षों में लगभग 85 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन केवल 18 लाख मामलों में कार्रवाई हुई और लगभग 5500 करोड़ रुपए की ठगी रोकी जा सकी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि समस्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि रोकथाम की गति बहुत धीमी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मजबूत तकनीकी सुरक्षा तंत्र विकसित करना और बैंकिंग तथा सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा ग्रामीण क्षेत्र डिजिटल ठगी के सबसे बड़े लक्ष्य बने रहेंगे।

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