डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’
जब से मनुष्य ने अंगूठा नचाकर ‘ऑनलाइन शॉपिंग’ की कला सीखी है, तब से ‘धोखा’ खाना केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि एक ‘अनुभव’ बन गया है। हमारे एक परिचित हैं—’पन्नालाल जी’। पन्नालाल जी का मानना है कि जो चीज इंटरनेट पर चमकती है, वही असली है। उनके लिए ‘अमेजन’ और ‘फ्लिपकार्ट’ किसी आधुनिक तीर्थस्थल से कम नहीं हैं, जहाँ ‘सेल’ के नाम पर रोज पुण्य बांटा जाता है।
एक दिन पन्नालाल जी की नजर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर एक ऐसी जैकेट पर पड़ी, जिसे पहनकर मॉडल किसी हॉलीवुड फिल्म का ‘कमांडो’ लग रहा था। जैकेट का रंग ऐसा गहरा भूरा जैसे किसी शेर की खाल हो, और उस पर इतने बटन और जिप थे कि अगर चोर उसे पकड़ ले, तो आधे घंटे तक तो वह यही ढूंढता रह जाए कि इसे खोलना कहाँ से है। विज्ञापन कह रहा था— “विंटर स्पेशल: राजसी ठाठ, शेर जैसी दहाड़!”
पन्नालाल जी ने अपनी तोंद का साइज और जैकेट के ‘फिटिंग चार्ट’ का मेल बिठाने के लिए श्रीलाल शुक्ल के ‘वैद्य जी’ जैसी दार्शनिकता का सहारा लिया। उन्होंने सोचा— “भले ही मेरा शरीर ‘लौकी’ जैसा है, पर यह जैकेट मुझे ‘चंदन’ बना देगी।” भारी डिस्काउंट देखकर उन्होंने तुरंत ‘ऑर्डर’ बटन दबा दिया। अगले तीन दिन पन्नालाल जी ने वैसे ही बिताए जैसे कोई भक्त भगवान के अवतरण की प्रतीक्षा करता है।
अंततः ‘डिलीवरी बॉय’ आया। पन्नालाल जी ने डब्बा ऐसे थामा जैसे कोई युद्ध का विजेता शत्रु का सिर लाया हो। उन्होंने डब्बा खोला। भीतर से जो वस्तु निकली, उसे देखकर पन्नालाल जी के फेफड़ों की हवा ‘पंक्चर’ हो गई।
जैकेट का रंग ‘शेर की खाल’ जैसा नहीं, बल्कि उस ‘दीमक लगी लकड़ी’ जैसा था जिसे देखकर घिन आ जाए। और साइज? साइज का आलम यह था कि वह जैकेट पन्नालाल जी को आना तो दूर, उनके पालतू कुत्ते ‘टाइगर’ को भी छोटी पड़ रही थी। जो बटन विज्ञापन में फौलादी लग रहे थे, वे वास्तव में ऐसे थे कि जरा सा जोर लगाने पर ‘कंचों’ की तरह बिखरने को तैयार थे। जिसे ‘शेर की दहाड़’ कहा गया था, वह पहनकर पन्नालाल जी किसी ‘मरे हुए चूहे’ की तरह सिकुड़ गए थे।
पन्नालाल जी गुस्से में लाल-पीले होकर ‘कस्टमर केयर’ को फोन लगाने ही वाले थे कि उनकी पत्नी वहाँ आ गईं। उन्होंने उस ‘चीथड़े’ को देखा और बड़े गौर से जैकेट के टैग को पढ़ा।
पत्नी ने तंज कसते हुए कहा, “अरे! ये क्या मंगवाया है? ये तो किसी नर्सरी के बच्चे का रेनकोट लग रहा है!”
पन्नालाल जी झल्लाकर बोले, “ये स्कैम है! मैं केस करूँगा! उन्होंने शेर दिखाया था और ये चूहा भेज दिया!”
तभी पत्नी की नजर डब्बे के कोने में पड़ी एक छोटी सी पर्ची पर गई। उस पर बारीक अक्षरों में लिखा था— “प्रिय ग्राहक, यह जैकेट विशेष रूप से ‘कठपुतलियों’ (Puppets) के लिए तैयार की गई है। आपने ‘ह्यूमन साइज’ के बजाय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल साइज’ चुना है। यदि आप इसे पहनना चाहते हैं, तो कृपया पहले अपनी हड्डियाँ निकलवाकर शरीर को रुई जैसा बनवा लें।”
पन्नालाल जी वहीं बैठ गए। अब वे न तो फोन कर पा रहे थे और न ही गुस्सा। अब वे इस चिंता में हैं कि उस जैकेट का क्या करें, क्योंकि उनके मोहल्ले में ऐसी कोई कठपुतली नहीं है जो उनके जैसा ‘राजसी ठाठ’ चाहती हो!