लखनऊ। राज्य सूचना आयुक्त डॉ दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से ही विश्व शांति संभव है। क्योंकि इसमें मानव कल्याण का भाव समाहित है। राज्य सूचना आयुक्त एपी सेन मेमोरियल गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के समापन सत्र में सहभागी हुए। प्राचार्य प्रो रचना श्रीवास्तव ने आगंतुकों का स्वागत किया। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रो जयशंकर पांडेय और संयोजक प्रो श्वेता तिवारी थी। मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त ने संगोष्ठी के विषय *भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य,विज्ञान,संस्कृति और संस्कार* को सामयिक बताया। भारत की ज्ञान परंपरा में परिवार प्रबोधन,पर्यावरण संरक्षण,कर्तव्य बोध को महत्व दिया गया। इस समय दुनिया में युद्ध का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद निरर्थक साबित हो चुके है। क्योंकि उनका वैचारिक आधार ही कमजोर है। विश्व शांति का आधार भारतीय ज्ञान परंपरा में है। यही वह तत्व थे जिसने भारत को विश्व गुरु पद पर प्रतिष्ठित किया था। सदियों की परतंत्रता में यह गौरव कमजोर हुआ। संकुचित विचार और उपभोगवादी सभ्यता ने लोगों के सामने संकट उत्त्पन्न किया है। मानवता के कल्याण हेतु शांति सौहार्द का होना आवश्यक है। यह संस्कार भारत से ही मिल सकता है।