लकड़ी माफिया प्रकरण: वायरल वीडियो से मचा बवाल, मुकदमा दर्ज

बिजनौर । अफजलगढ़–रेहड़ क्षेत्र में अवैध लकड़ी तस्करी के मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब एक कथित वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में एक व्यक्ति वनकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक साजिश की बात करता सुनाई दे रहा है, जिससे प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मच गया।वन विभाग की कार्रवाई और विवाद की शुरुआत घटना बुधवार की बताई जा रही है, जब वन विभाग की टीम ने अफजलगढ़ क्षेत्र में अवैध लकड़ी से भरी एक पिकअप वैन को पकड़ा। आरोप है कि टीम से बचने के प्रयास में तस्करों ने मीरापुर चौराहे के पास लकड़ी उतार दी, लेकिन टीम ने आरोपितों को पकड़ लिया।जब वनकर्मी आरोपितों को लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में कुछ लोगों ने हस्तक्षेप किया और कथित रूप से एक आरोपी को छुड़ा लिया। इस दौरान वनकर्मियों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की भी बात सामने आई है।वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद इसी घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें एक कथित पदाधिकारी वनकर्मियों के खिलाफ झूठे दुष्कर्म मुकदमे दर्ज कराने की बात करता सुनाई दे रहा है।read more:https://worldtrustednews.in/program-held-on-the-first-home-arrival-of-pcs-officer/ इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।वन विभाग ने वीडियो को उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक भेजते हुए कार्रवाई की मांग की है।मुकदमा दर्ज, जांच जारी वन विभाग की तहरीर पर अफजलगढ़ थाने में लकड़ी माफिया और एक संगठन के जिला उपाध्यक्ष मदन सिंह राणा सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।क्षेत्राधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि आरोपितों—शमशेर, लखबीर सिंह और मदन सिंह राणा के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।वन विभाग का पक्ष डीएफओ जय सिंह कुशवाहा ने बताया कि पूरे मामले की तहरीर संबंधित थानों में दी गई है और वायरल वीडियो भी उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।आरोपों से इनकार दूसरी ओर, भाकियू जिला उपाध्यक्ष मदन सिंह राणा ने वायरल वीडियो में किए गए कथित बयान से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि वे किसानों के हितों के लिए संघर्ष करते हैं और इस प्रकार की कोई बात उन्होंने या उनके साथियों ने नहीं कही।यह मामला अब कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्रवाई और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता—तीनों पहलुओं से जांच के दायरे में है। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर ही दोषियों के खिलाफ आगे की सख्त कार्रवाई की ।

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