आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाए ट्रंप! युद्ध पर बोलने वाले पोप लियो को बताया कमजोर

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को वेटिकन सिटी के प्रमुख पोप लियो 14 के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी तीखी आलोचना की है। ट्रंप ने पोप को विदेश नीति और अपराध नियंत्रण के मुद्दों पर टेरिबल (बेहद खराब) करार देते हुए आरोप लगाया कि वे केवल कट्टर वामपंथियों (रेडिकल लेफ्ट) को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कैथोलिक चर्च की गरिमा और प्रभाव को भारी नुकसान हो रहा है।यह विवाद तब शुरू हुआ जब पोप लियो 14 ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर चिंता व्यक्त की थी। इसके जवाब में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जमकर भड़ास निकाली। ट्रंप ने कहा, पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिहाज से तो वे बेहद खराब हैं।read more:https://khabarentertainment.in/district-level-review-committeedistrict-advisory-committee-meeting-concluded/ वे हमारे प्रशासन के डर की बात करते हैं, लेकिन कोविड के उस दौर को भूल जाते हैं जब चर्चों में प्रार्थना करने पर पादरियों और मंत्रियों को गिरफ्तार किया जा रहा था। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उनके भाई लुईस अधिक पसंद हैं क्योंकि वे मागा समर्थक हैं और चीजों की सही समझ रखते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसा पोप नहीं चाहिए जो ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को जायज समझे या वेनेजुएला जैसे देशों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करे। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अमेरिका में ड्रग्स और अपराधी भेज रहा है और एक राष्ट्रपति के तौर पर वे वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें भारी बहुमत से चुना गया है—देश को सुरक्षित बनाना और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि पोप बनने की किसी भी सूची में लियो का नाम नहीं था और उन्हें केवल इसलिए चुना गया क्योंकि वे एक अमेरिकी हैं और चर्च को लगा था कि वे ट्रंप से बेहतर तरीके से निपट पाएंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर वे व्हाइट हाउस में न होते, तो शायद लियो वेटिकन में नहीं होते। ट्रंप ने पोप को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें राजनीति छोड़कर एक महान धार्मिक गुरु बनने पर ध्यान देना चाहिए और ओबामा समर्थकों जैसे वामपंथी विचारकों से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि पोप को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और कट्टर वामपंथियों के बजाय सामान्य ज्ञान का इस्तेमाल कर चर्च के हितों की रक्षा करनी चाहिए।

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