2034 के बजाय 2029 में ही महिला आरक्षण लागू करना चाहती है सरकार

नई दिल्ली। बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में विचार कर रही है।लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50फीसदी स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला प्रस्तावित है। गृह मंत्री अमित शाह नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 23 मार्च को गृह मंत्री ने एनसीपी-एसपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और वॉयएसआरसीपी के सदस्यों के साथ बैठक की। बीआरएस आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी। सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया। सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी कर रही है। सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाए। सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी। इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं। हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/tension-between-afghanistan-and-pakistan-is-once-again-reaching-a-dangerous-point/  इसके तहत 50फीसदी स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो। अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50फीसदी की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है। इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50फीसदी का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या में से 33फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन 33फीसदी आरक्षित सीटों के अंदर एससी/एसटी आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा। संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है। पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है।read more:https://khabarentertainment.in/former-minister-arvind-singh-gop-invited-to-the-enlightened-conference/ बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए। सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे? कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज जताया है। डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए संयुक्त कार्रवाई समिति मंच बनाया था। स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था। महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है। दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के

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