अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच रहा  है।

 अशोक भाटिया :सोमवार की देर रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर दिया। अफगानिस्तान के उप सरकारी प्रवक्ता ने इस हमले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में नशाखोरों का इलाज करने वाले एक अस्पताल को निशाना बनाया। इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गई है।पाकिस्तान ने सोमवार की देर रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर जो हवाई हमला कर दिया उसके बारे में  अफगानिस्तान के उप सरकारी प्रवक्ता ने इस हमले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में नशाखोरों का इलाज करने वाले एक अस्पताल को निशाना बनाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में, हमदुल्लाह फितरत ने कहा कि सोमवार रात हुए हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। उन्होंने बताया कि अब तक मरने वालों की संख्या 400 हो गई है, जबकि 250 लोग घायल हुए हैं। फितरत ने कहा कि बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और पीड़ितों के शवों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।अफ़गानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने अस्पताल पर हुए हमले में आम नागरिकों की मौत पर चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा है कि अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। काबुल में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि निवासियों ने शहर के ऊपर लगातार हवाई गतिविधियों की सूचना दी है। पाकिस्तानी सेना ने हाल के हफ्तों में कई बार काबुल पर हमले किए हैं, जिससे भारी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं।बता दें कि पाकिस्तान ने पहले अस्पताल को निशाना बनाने से इनकार किया था और कहा था कि सोमवार को काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान में किए गए अन्य हमलों में किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया था। इसके अलावा अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सेना पर हवाई हमलों में काबुल के उस अस्पताल को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जहां नशाखोरों का इलाज किया जाता है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 400 से अधिक लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पूर्वी अफगानिस्तान में किए गए हमलों में किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया था।अफगानिस्तानी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने बताया कि अस्पताल का पूरा हिस्सा नष्ट हो गया है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी वीडियो पोस्ट किया। स्थानीय टेलीविजन स्टेशनों ने एक इमारत के मलबे में दमकलकर्मियों को आग बुझाने के लिए संघर्ष करते हुए फुटेज प्रसारित किया। यह कथित हमला अफगान अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें अफगानिस्तान में चार लोग मारे गए। पड़ोसी देशों के बीच वर्षों में सबसे भीषण संघर्ष तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है।दूसरी तरफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया था। X पर एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में “काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी आतंकवादियों के सैन्य प्रतिष्ठानों और आतंकवादी समर्थन बुनियादी ढांचे, जिनमें तकनीकी उपकरण और गोला-बारूद भंडार शामिल हैं, को सटीक रूप से निशाना बनाया गया था।” मंत्रालय ने कहा कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का लक्ष्यीकरण “सटीक और सावधानीपूर्वक किया गया था ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो।” यही नहीं बताया जा रहा है कि हमले के बाद यहां स्थित एक बड़े कमर्शियल मार्केट में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 150 से ज्यादा दुकानें जलकर खाक हो गईं और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला रिहायशी और व्यावसायिक इलाके के करीब हुआ, जिससे लोगों में डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर इस घटना के खौफनाक वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें जलकर राख हुआ बाजार साफ दिखाई दे रहा है।स्थानीय बख्तावर न्यूज एजेंसी के हवाले से मेयर मौलवी अब्दुल्ला मुस्तफा बताया कि रविवार सुबह करीब 4 बजे शहर की ओर कई गोले दागे गए। ये गोले एक बाजार में गिर गए, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों को काफी मेहनत करनी पड़ी।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों देश आपस में क्यों लड़ रहे हैं। खुद को मुसलमानों का लीडर बताने वाला मुल्क पाकिस्तान आखिर मासूमों की जान क्यों ले रहा है? आइये जानते हैं पूरी डिटेलइस संघर्ष के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान का यह आरोप है कि अफगान तालिबान पाकिस्तान के आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को सुरक्षित ठिकाने दे रहा है। टीटीपी को पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। पाकिस्तान का कहना है कि यह संगठन अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहा है, जबकि अफगान तालिबान बार-बार इस आरोप से इनकार करता रहा है।अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एक हवाई हमला भी किया था। पाकिस्तान की सेना ने कहा था कि यह हमला पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सबसे घातक टकराव हुआ, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से सबसे बड़ा माना गया। उसी महीने कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति समझौता कराया गया था। लेकिन सऊदी अरब की मध्यस्थता में चल रही बाद की बातचीत 2025 के अंत तक टूट गई।इसके बाद से सीमा पर हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं। 16 फरवरी को एक आत्मघाती हमलावर ने सीमा सुरक्षा चौकी पर हमला किया, जिसमें 11 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी और एक बच्चे की मौत हो गई। यह जानकारी पाकिस्तान की सेना ने दी। 22 फरवरी को पाकिस्तान ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। वहीं अफगान अधिकारियों का कहना था कि इन हमलों में कम से कम 18 लोग, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे, मारे गए। इसके बाद अफगानिस्तान ने बदले की चेतावनी दी और दोनों देशों के बीच ताजा संघर्ष शुरू हो गया। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अपने गठन के समय से ही खुद को अफगान तालिबान का विस्तार बताता रहा है। यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा उग्रवादी संगठन है और अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है।टीटीपी का गठन 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद की स्थिति से जुड़ा हुआ है। उस समय कई पाकिस्तानी उग्रवादी, जो अफगान लड़ाकों के साथ लड़ चुके थे, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ हो गए क्योंकि पाकिस्तान ने अमेरिका के आतंकवाद विरोधी अभियान का समर्थन किया था। ये उग्रवादी बाद में टीटीपी के शुरुआती सदस्य बने और उन्होंने अफगान तालिबान, अल-कायदा और अन्य उग्रवादी समूहों को शरण दी।अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान सरकार ने बाद में इन ठिकानों पर कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तानी उग्रवादियों, अफगान तालिबान और अल-कायदा के बीच संबंध और मजबूत हो गए। टीटीपी की आधिकारिक स्थापना 2007 में हुई।टीटीपी एक ढीले ढांचे वाला संगठन है। इसके कई गुट हैं जिनका मुख्य लक्ष्य पाकिस्तान की सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई करना, पश्चिमी प्रभाव का विरोध करना और अपने नियंत्रण वाले इलाकों में शरीयत कानून लागू करना है। समय के साथ इसकी रणनीति में बदलाव भी हुआ है। 2013 में मुल्ला फजलुल्लाह के नेतृत्व में यह संगठन अल-कायदा के और करीब आ गया और सीमा पार हमले बढ़ गए। 2020 में फजलुल्लाह की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के दो साल बाद टीटीपी ने कहा था कि उसका मुख्य लक्ष्य केवल पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाना है।हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध खराब हुए हैं, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में दोनों देश सहयोगी थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने अफगान तालिबान के गठन में मदद की थी। 2001 से पहले पाकिस्तान ने तालिबान सरकार को सैन्य सलाहकार, विशेषज्ञ और सैनिक उपकरण चलाने के लिए कर्मियों की सहायता भी दी थी।2001 में अमेरिका और नाटो के साथ आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के बाद पाकिस्तान का तालिबान के प्रति समर्थन गुप्त हो गया। अमेरिकी विदेश विभाग और कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्टों के अनुसार, साथ ही 2012 में लीक हुई एक नाटो रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने अफगान तालिबान की सीधे मदद की और उन्हें शरण भी दी। 2021 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुलाए और तालिबान सत्ता में आया, तब पाकिस्तान ने शुरू में नई सरकार का स्वागत किया। उस समय पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने तालिबान की वापसी को अफगानों द्वारा “गुलामी की जंजीरों को तोड़ने” जैसा बताया था।इसके बाद हालात और बिगड़ गए। जब अफगान सेना ने बताया कि कायरता पूर्वक पाक की आर्मी ने मासूम बस्ती को निशाना बनाया। जिसमें एक बच्चे का पूरा परिवार खत्म हो गया। अफगान सरकार ने सवाल भी खड़ा किया था कि क्या ये आतंकवादी है? इसका बदला हम लेकर रहेंगे।अफगान सेना (Afghanistan) की तरफ से हुए हमलों के बाद पाकिस्तान ने कई बॉर्डर इलाकों में अफगान सेना की कथित “बिना उकसावे वाली फायरिंग” का जवाब देने के लिए एक सैन्य अभियान शुरू किया। पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Ghazab Lil-Haq’ रखा। इस ऑपरेशन के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

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