श्रीमद्भागवत कथा छठवें दिन: आचार्य नवलेश जी ने विवाह को धार्मिक संस्कार बताया

पहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात श्रीमद्भागवत पीठ श्रीधाम चित्रकूट के संस्थापक आचार्य पंडित नवलेश जी महाराज ने कहा कि विवाह एक धार्मिक संस्कार है, जो दो आत्माओं को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि जीव आनंदमय तब बनता है जब वह सत्य की खोज करता है और तभी उसे ईश्वर की प्राप्ति हो पाती है।आचार्य नवलेश जी ने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को आदर्श नागरिक का जीवन जीने की प्रेरणा देती है और सनातन धर्म को मानने वाले व्यक्तियों को अकाल मृत्यु से बचाती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अवश्य सुननी चाहिए, जिससे पितृ देवताओं को भी आनंद मिलता है।कथा आचार्य ने भगवान श्री कृष्ण की माखन चोरी लीला पर चर्चा करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग के युवाओं को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के गरीबों और असहाय वर्ग के लोगों की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची आराधना होती है।
इस अवसर पर ग्राम फतेहपुर रोशनाई के लोगों ने कथा आचार्य पंडित नवलेश दीक्षित जी का स्वागत किया और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर भुवनेश त्रिपाठी, योगेश त्रिपाठी, शील त्रिपाठी, बृजेश त्रिपाठी, केशव त्रिपाठी, माधव त्रिपाठी, अरविंद त्रिपाठी, दीपक त्रिपाठी, नितिन त्रिपाठी, देबू त्रिपाठी, राजकुमार त्रिपाठी, छानू त्रिपाठी, विश्वास त्रिपाठी, कृष्ण त्रिपाठी आदि प्रमुख लोगों के अलावा भारी संख्या में कथा श्रोता उपस्थित थे।

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