युद्ध के चलते भारत के आयात-निर्यात पर बड़ा असर

Sneha Singh:ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से भारत सहित कई देशों के सैकड़ों जहाज बीच समुद्र में फंस गए हैं। इसका सीधा असर भारत की आयात और निर्यात व्यवस्था पर पड़ा है।
0 एलपीजी आयात पर गहरा संकट
युद्ध के कारण हाल ही में भारत के 10 एलपीजी कार्गो रद्द कर दिए गए हैं। प्रत्येक कार्गो में लगभग 46,000 टन एलपीजी था। यानी कुल 4.6 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। फरवरी में भारत ने कुल 22.6 लाख टन एलपीजी आयात की थी, जिसमें से 19.4 लाख टन खाड़ी देशों से होर्मुज मार्ग के जरिए आया था। भारत की कुल एलपीजी सप्लाई का 85 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है।सऊदी अरब के सऊदी अरामको के जुबैल और जुआयमाह टर्मिनल पर हमलों के बाद सप्लाई पहले ही प्रभावित थी। जुआयमाह दुनिया का सबसे बड़ा एलपीजी निर्यात केंद्र माना जाता है, जहां से हर महीने लगभग 4.5 लाख टन एलपीजी निर्यात होता है, जिसमें से 60 प्रतिशत भारत को जाता है।भारत के पास लगभग 15 दिन का कच्चे तेल और 10 दिन का ईंधन भंडार है, लेकिन एलपीजी के भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो देश में एलपीजी संकट गहरा सकता है।read more :https://pahaltoday.com/president-attends-empowered-women-prosperous-delhi-programme/
0 कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका
खाड़ी क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल निर्यातक क्षेत्र है। वर्तमान स्थिति में लगभग 700 तेल टैंकर फंसे हुए बताए जा रहे हैं, जिनमें करोड़ों बैरल कच्चा तेल लदा है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। यदि स्थिति सामान्य नहीं हुई तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। 0 निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित
युद्ध का असर केवल आयात पर ही नहीं, बल्कि भारत के निर्यात पर भी पड़ा है। वर्तमान में लगभग 200 कार्गो जहाज़ फंसे हुए हैं, जिनमें करीब 5 लाख कंटेनर लदे हैं। इनमें भारत के लगभग 2,500 कंटेनर शामिल हैं। इन कंटेनरों में महाराष्ट्र और गुजरात से भेजे गए अंगूर, केला, आम, अनार, सेब जैसे ताजे फल हैं, जो 10 दिनों से समुद्र में फंसे हैं। अधिक देरी होने पर कोल्ड स्टोरेज कंटेनर होने के बावजूद इनके खराब होने की आशंका है।भारत हर साल लगभग 50,000 करोड़ रुपए के बासमती चावल ईरान को निर्यात करता है, जिसमें से करीब 20,000 करोड़ रुपए का माल फिलहाल फंसा हुआ है। इसके अलावा चाय, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्रोजन मीट और सी-फूड की खेप भी प्रभावित हुई है।0 वैकल्पिक मार्ग से बढ़ेगा समय और लागत यदि होर्मुज मार्ग बंद रहता है तो भारत को अफ्रीका का चक्कर लगाकर जहाज भेजने होंगे। इससे लगभग 6,000 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी और माल पहुंचने में 15–20 दिन की देरी होगी। परिवहन लागत में 40–60 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।सामान्यतः 10–12 दिनों में खाड़ी देशों तक पहुंचने वाला फल-सब्जी का माल नए मार्ग से लगभग 30 दिन में पहुंचेगा, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी।
0 दक्षिण एशिया पर व्यापक प्रभाव एलपीजी निर्यात रुकने से दक्षिण एशिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के कई हवाई अड्डों और बंदरगाहों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबा असर डाल सकता है। फिलहाल भारत को आयात और निर्यात दोनों मोर्चों पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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