मेंटल हेल्थ : घाना के युवा दुनिया में सबसे ज्यादा मजबूत

Sneha Singh: सैपियंस लैब द्वारा किए गए 84 देशों के अध्ययन में भारत 60वें स्थान पर, अमेरिका, ब्रिटेन,  ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस जैसे देश भी पीछे
सब-सहारा अफ्रीका के अन्य छोटे, पिछड़े और गरीब देशों के युवा भी मानसिक स्थिति के मामले में ज्यादा मजबूत और आगे हैं। इस सूची में घाना पहले स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया दूसरे और केन्या तीसरे स्थान पर आते हैं। जिम्बाब्वे चौथे और तंजानिया पांचवें स्थान पर आते हैं। बॉटम-10 देशों में विकसित देशों के नाम आते हैं। इस सूची में हांगकांग शीर्ष स्थान पर है। उसके बाद ताइवान दूसरे स्थान पर, जापान तीसरे, ब्रिटेन चौथे और चीन पांचवें स्थान पर हैं। ब्राजील छठे, यूक्रेन सातवें और किर्गिस्तान आठवें तथा न्यूजीलैंड नौवें और बांग्लादेश 10वें स्थान पर आते हैं। घाना में युवा परिवार के साथ ही रहते हैं। वे भाई-बहनों और रिश्तेदारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। वे अपने परिवार की मदद को प्राथमिकता देते हैं। दूसरी ओर यहां आध्यात्मिकता और धार्मिक जुड़ाव भी ज्यादा है। उसके कारण भी उन्हें मानसिक समर्थन मिल रहा है।दुनिया भर में जो परिस्थितियां चल रही हैं और उसका असर दुनिया के लोगों पर जिस तरह पड़ रहा है, उसके संदर्भ में हाल ही में एक वैश्विक अध्ययन सामने आया है। सैपियंस लैब द्वारा हाल ही में 84 देशों के युवाओं पर एक अध्ययन किया गया था। ‘ग्लोबल माइंड हेल्थ’ नाम की इस रिपोर्ट में 18 वर्ष से 34 वर्ष के युवाओं की मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास किया गया था। युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के जो निष्कर्ष सामने आए, उन्होंने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यूथ मेंटल हेल्थ में घाना दुनिया में शीर्ष स्थान पर है। घाना के युवा, यानी जिन्हें यंग एडल्ट कहा जाता है, मजबूत मनोबल वाले और मानसिक रूप से स्वस्थ माने गए हैं।इस सूची में भारत के युवा काफी पीछे हैं। इस सूची में भारत 60वें स्थान पर आता है। दूसरी ओर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, चीन, जापान जैसे देश भी इस सूची में काफी पीछे हैं। जापान तो लगभग सबसे आखिरी स्थान पर ही आता है, ऐसा कहा जाता है। शोधकर्ताओं द्वारा मेंटल हेल्थ कॉन्सेप्ट के आधार पर हर देश को अंक दिए गए थे। इसमें घाना के अंक सबसे ज्यादा थे। इसमें बताया गया है कि ज्यादा आय और समृद्धि वाले देशों के युवाओं की मनोदशा कमजोर पाई गई। दूसरी ओर गरीब और संघर्ष करने वाले देशों के युवाओं का मनोबल अत्यंत मजबूत है।read more:https://pahaltoday.com/lok-sabha-speaker-shri-om-birla-flagged-off-the-all-women-bike-rally-2026-organised-by-navbharat-times-at-connaught-place-new-delhi-on-the-occasion-of-international-womens-day/ जानकारों के अनुसार गरीबी, संघर्ष, पीड़ा और कठिनाइयों के बावजूद ये युवा आगे हैं। केवल घाना ही आगे है, ऐसा नहीं है। सब-सहारा अफ्रीका के अन्य छोटे, पिछड़े और गरीब देशों के युवा भी मानसिक स्थिति के मामले में ज्यादा मजबूत और आगे हैं। इस सूची में घाना पहले स्थान पर है, लेकिन नाइजीरिया, केन्या, तंजानिया जैसे देश भी ऊपर हैं। इस सूची में नाइजीरिया दूसरे स्थान पर है, जबकि केन्या तीसरे स्थान पर आता है। जिम्बाब्वे चौथे और तंजानिया पांचवें स्थान पर है। इन सभी देशों के अंक वैश्विक औसत से काफी ज्यादा हैं। वैश्विक औसत 38 है, जबकि इन देशों के अंक 50 से 60 के बीच हैं। इसके अलावा 40 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों के मामले में तो 100 से भी ज्यादा अंक पाए गए हैं।इसके अलावा टॉप-10 देशों में डोमिनिकन रिपब्लिक, इंडोनेशिया, फिलीपींस, रवांडा और इजराइल का भी समावेश है। दूसरी ओर सबसे कम अंक पाने वाले और सबसे नीचे आने वाले बॉटम-10 देशों में विकसित देशों के नाम आते हैं। इस सूची में हांगकांग शीर्ष स्थान पर है। उसके बाद ताइवान दूसरे स्थान पर, जापान तीसरे, ब्रिटेन चौथे और चीन पांचवें स्थान पर हैं। ब्राजील छठे, यूक्रेन सातवें और किर्गिस्तान आठवें तथा न्यूजीलैंड नौवें और बांग्लादेश 10वें स्थान पर आते हैं। औसत सूची देखें तो बेल्जियम और मेक्सिको 52वें स्थान पर आते हैं। इसी तरह फ्रांस और अमेरिका 58वें स्थान पर आते हैं। इसी तरह अफगानिस्तान, रूस और भारत इस सूची में 60वें स्थान पर हैं। कनाडा और पाकिस्तान इस सूची में 65वें स्थान पर आते हैं। इसके अलावा जर्मनी 71वें स्थान पर और आस्ट्रेलिया 74वें स्थान पर आता है। इन सभी बड़े देशों के युवा बड़ी मानसिक परेशानियों में फंसे हुए हैं। उनकी मानसिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है।read morehttps://pahaltoday.com/lok-sabha-speaker-shri-om-birla-flagged-off-the-all-women-bike-rally-2026-organised-by-navbharat-times-at-connaught-place-new-delhi-on-the-occasion-of-international-womens-day/
जानकारों के अनुसार शोधकर्ताओं ने कुछ मापदंडों के आधार पर दुनिया के 84 देशों के युवाओं की मानसिक स्थिति का मूल्यांकन किया था। इसमें भावनात्मक, सामाजिक, संज्ञानात्मक और शारीरिक क्षमताओं को महत्व दिया गया था। इन मापदंडों के आधार पर घाना के युवाओं को 100 में से 54 अंक मिले। दूसरी ओर वैश्विक औसत केवल 36 है। शोधकर्ताओं के अनुसार घाना के लोगों सहित अफ्रीका के युवा आर्थिक, सामाजिक और अन्य चुनौतियों का सामना करते हुए भी उनमें हिम्मत, मनोबल और साहस ज्यादा है। उनके मजबूत सामुदायिक संबंध, कम उम्र में मोबाइल और अन्य स्मार्ट गैजेट्स से दूर रहना, सुरक्षा देने वाली सांस्कृतिक संरचना आदि के कारण वे मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत और सक्षम हैं।दूसरी ओर पश्चिमी देशों और विकसित देशों में बच्चे से लेकर युवा तक डिजिटल ओवरलोड का शिकार हैं और सोशल मीडिया आदि के कारण अकेलेपन के सबसे ज्यादा शिकार पाए गए हैं। समृद्ध देशों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, टाक्सिन और कमजोर सामाजिक संबंधों के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी मानसिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। नई पीढ़ी मानसिक रूप से ज्यादा कमजोर होती जा रही है। वे बदलती परिस्थितियों, आर्थिक संकट, सामाजिक बहिष्कार या सामाजिक भेदभाव को स्वीकार नहीं कर पाते और उनमें जल्दी सामंजस्य भी नहीं बैठा पाते। इसके अलावा सोशल मीडिया के कारण लगातार संघर्ष, तुलना और अकेलेपन के कारण हीन भावना भी बढ़ गई है। इसके कारण उनका मानसिक दबाव भी बढ़ गया है।उल्लेखनीय है कि घाना के युवा आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत जुड़ाव रखते हैं। इसके कारण उनकी मानसिक स्थिति भी ज्यादा मजबूत रहती है। वे निराशा, आत्महत्या के विचार और अकेलेपन से दूर रहते हैं तथा जीवन जीने के कौशल जल्दी सीखकर जीवन को बदलने का प्रयास करते हैं। यहां के युवा औसतन 18 वर्ष की उम्र में पहली बार स्मार्टफोन या स्मार्ट गैजेट लेते हैं। दूसरी ओर विकसित देशों में यह उम्र 10 से 14 वर्ष है। स्मार्टफोन हाथ में आते ही आक्रामकता, अलगाव, अकेलापन और तुलना की भावना बढ़ने लगती है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि घाना में मजबूत पारिवारिक और सामुदायिक संरचना है, जो युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। मजबूत सामुदायिक जुड़ाव, सामाजिक समर्थन, तकनीक पर कम निर्भरता, स्वस्थ जीवनशैली और शारीरिक श्रम युवाओं को शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से भी अधिक सक्षम बनाते हैं।
मूल बात यह है कि घाना पश्चिमी अफ्रीका का एक सुंदर और शांत देश है। इसे अफ्रीका का गेटवे भी कहा जाता है। यह पहला अफ्रीकी देश है, जिसे ब्रिटेन ने 1957 में स्वतंत्र किया था। यहां की संस्कृति बहुत जीवंत है, मेहमाननवाजी को महत्व देती है और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देती है। 3.5 करोड़ की आबादी वाले इस देश की प्रति व्यक्ति आय 8,000 डालर है। यहां बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है, फिर भी युवा मानसिक रूप से ज्यादा सक्षम हैं। यहां पारिवारिक संरचना बहुत मजबूत है। यहां बच्चे हमेशा बड़ों का सम्मान करते हैं। यहां सामुदायिक एकता को महत्व दिया जाता है और पड़ोसी तथा रिश्तेदार आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। इसी कारण युवा ज्यादा मजबूत हैं।read more:https://pahaltoday.com/lok-sabha-speaker-shri-om-birla-flagged-off-the-all-women-bike-rally-2026-organised-by-navbharat-times-at-connaught-place-new-delhi-on-the-occasion-of-international-womens-day/
घाना की बात करें तो यहां हाईलाइफ म्यूजिक, हाईलाइफ और पारंपरिक नृत्य बहुत चर्चित हैं। दुनिया भर में इसकी चर्चा होती है। ड्रमिंग और नृत्य जीवन का हिस्सा हैं। सामान्य और सामूहिक उत्सवों में भी इसे महत्व दिया जाता है। यहां के युवा परिवार के साथ ही रहते हैं। वे भाई-बहनों और रिश्तेदारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। वे अपने परिवार की मदद को प्राथमिकता देते हैं। दूसरी ओर यहां आध्यात्मिकता और धार्मिक जुड़ाव भी ज्यादा है। इसके कारण उन्हें मानसिक समर्थन भी मिलता है।यहां शिक्षा पर जोर दिया जाता है, लेकिन नौकरियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। युवा नौकरी से ज्यादा व्यवसाय करना पसंद करते हैं।वे स्क्रीन टाइम कम रखते हैं और लोगों से वास्तविक रूप में मिलकर आनंद लेना ज्यादा पसंद करते हैं। यहां बेरोजगारी है, लेकिन युवा आशावादी और रचनात्मक हैं।जानकारों के अनुसार भारत ही नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों, विकसित देशों और महाशक्तियों में भी युवा मानसिक रूप से कमजोर हैं। सबसे पहले पारिवारिक संरचना कमजोर हो गई है। यहां न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ गया है। परिवार टूटकर अलग हो गए हैं। दूसरी ओर यहां स्मार्टफोन और स्मार्ट गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग है। समृद्ध देशों में औसतन 12 से 14 वर्ष की उम्र में और भारत में लगभग 16 वर्ष की उम्र तक किशोरों और युवाओं को स्मार्टफोन मिल जाता है। इसके कारण साइबर बुलिंग, अनिद्रा, अनावश्यक तुलना, अकेलापन और अन्य मानसिक समस्याएं बढ़ने लगती हैं। दूसरी ओर इन युवाओं पर अकादमिक दबाव भी बहुत ज्यादा होता है। वे परीक्षा देने, कैरियर बनाने, अच्छी नौकरी पाने या व्यवसाय करने जैसी बातों को लेकर लगातार तनाव और पारिवारिक संघर्ष में रहते हैं। इसके अलावा अस्वीकृति और उपेक्षा का डर भी उनकी मानसिक स्थिति खराब कर देता है। एक और गंभीर बात यह है कि युवा धर्म और आध्यात्मिकता से दूर हो गए हैं। वे कभी-कभी धार्मिक हो जाते हैं, लेकिन आध्यात्मिकता को जीवन में उतार नहीं पाते। दूसरी ओर उनका खानपान भी असर डालता है। वे प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड के आदी हो गए हैं, जिसके कारण शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके कारण अवसाद में जाने के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मेंटल हेल्थ के बारे में समाज में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। इसे एक बीमारी की तरह देखा जाता है, जिसके कारण लोग अपनी मानसिक स्थिति किसी से साझा नहीं करते और ज्यादा दुखी होते जाते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सिंगल फैमिली, सोशल मीडिया, स्मार्टफोन, तुलना की प्रवृत्ति, खराब खानपान और कमजोर सामाजिक संरचना के कारण भारत और पश्चिमी देशों के युवा मानसिक रूप से अधिक कमजोर होते जा रहे हैं।

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