लखनऊ : मोतीझील, ऐशबाग स्थिति माधव कला मंडप में सात दिन चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने शनिवार को विराम ले लिया। अंतिम दिवस 51 सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया तत्पश्चात सुदामा प्रसंग के साथ हवन पूजन व भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।ममता चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं भाजपा अवध क्षेत्र के उपाध्यक्ष राजीव मिश्रा और श्रीमद्भागवत कथा समिति मालवीय नगर लखनऊ सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कृष्ण सुदामा मित्रता के प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा व्यास पं. रामशरण शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा एक ही गुरुकुल में पढ़ते थे। श्रीकृष्ण आगे चलकर द्वारिकाधीश बन जाते हैं। जबकि सुदामा निर्धन रहकर भगवान का भजन करते हैं। पत्नी सुशीला के बहुत हठ करने पर सुदामा एक दिन द्वारिका जाते हैं। सुदामा के आने की सूचना मिलते ही भगवान कृष्ण नंगे पैर ही उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। मुख्य द्वार से महल में लाकर आंसुओं से सुदामा के पैर धोते हैं। सुदामा के न मांगने के बाद भी कृष्ण उन्हें तीनों लोकों का वैभव दे देते हैं। कहा कि कृष्ण सुदामा की मित्रता आज भी प्रासंगिक है क्योंकि सुदामा ने प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं मांगा और ना ही भगवान ने उन्हें दिया। आचार्यश्री ने कहा कि आज मित्रता में लोग एक दूसरे का गला काटने को तैयार रहते हैं। उन्होंने लोगों को कृष्ण और सुदामा की मित्रता का अनुसरण करने की सलाह दी। मौजूद रहे रहे हजारों की संख्या में श्रोता गण को महाराज जी के द्वारा गाए गए दर्जनों भजनों पर झूमते हुए देखा गया। शाम चार बजे कथा ने विराम लिया। इसके बाद हवन पूजन और शाम 08 बजे आरती के उपरांत विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में भक्तो द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया। भण्डारा देर रात्रि तक चलता रहा।कथा प्रारंभ और समापन आरती में लखनऊ महानगर की महापौर सुषमा खर्कवाल अतिथि के रूप में उपस्थित रही। समापन आरती में मुख्य यजमान राजीव मिश्रा समिति के प्रमुख सदस्य कोषाध्यक्ष गौरव पांडे, अधिवक्ता संतोष माहेश्वरी, उपाध्यक्ष जितेश श्रीवास्तव, अमित गुप्ता, अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा, अधिवक्ता प्रदीप शर्मा, पत्रकार संजय तिवारी, शशिकान्त शुक्ल, रौनक सिंह, मोहित मिश्रा लक्ष्मी बहन, अनिल पाण्डेय, विमल कुमार एवं सैकडों की संख्या में भक्तजन मौजूद रहे मौजूद रहे।