राजा सिंह ने जंगलवासियों को चुनौतियों का सामना करने के पांच सूत्र दिए

वीरेंद्र बहादुर सिंह 
सिंह ने कहा, “पहले किसी भी राजा ने आपकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, लेकिन मेरे पास बिलकुल अलग दृष्टि है और उसकी मदद से मैं आपकी समस्याओं का समाधान कर रहा हूं।”“राजा सिंह की जय हो।” सिंह के सलाहकार रीछ एक ही सांस में बोलने लगे, “महाराज, जंगल में अभाव की शिकायतें बढ़ रही हैं। आप कुछ कीजिए।”“मैंने जंगलवासियों के सामने इतने कदम उठाए थे। दरबारियों और अधिकारियों के साथ मिलकर हमने उन्हें भरोसा दिलाया था, उसका कोई असर नहीं हुआ? जंगलवासियों में धैर्य ही नहीं है।” राजा सिंह झुंझला गए।कुछ दिन पहले ही जंगल का एक प्रतिनिधिमंडल राजा सिंह से मिला था और दाना-पानी-चारे की कमी की शिकायत की थी। पक्षियों के लिए गैस से पंखों के मसाज की व्यवस्था थी, लेकिन पंपों ने गैस के दाम बढ़ा दिए थे और जानवरों के पैरों में लिक्विड डालकर मसाज के लिए जो ईंधन इस्तेमाल होता था, उसके दाम भी बढ़ गए थे। इन सब शिकायतों के बाद राजा सिंह ने तुरंत दरबारियों से जानकारी लेकर जंगलवासियों को आश्वासन दिया था। यहां तक कि उन्होंने अपने द्वारा उठाए गए एक हजार कदमों का डेटा भी दिखाया था। उन्हें लगा था कि इसके बाद शिकायतें खत्म हो जाएँगी।read more:https://khabarentertainment.in/foundation-day-of-bharatiya-kisan-sangh-celebrated/ “आपके कदमों का असर दो-चार दिन ही रहा, लेकिन अभी भी गैस की कमी है। ईंधन के दाम बढ़ गए हैं। और आपके मित्र, विदेशी जंगल के राजा गोल्डन ईगल बारबार अपने फैसले बदलते रहते हैं, जिससे हमारे जंगलवासियों के व्यापार और रोजगार पर असर पड़ता है। जिस जंगल पर गोल्डन ईगल ने हमला किया है, वहां से हमारा काफी व्यापार होता था और।” रीछ की लंबी बातों से परेशान होकर राजा सिंह ने उन्हें रोकते हुए कहा, “ठीक है, ठीक है, मैं कुछ करता हूं।”रीछ को विदा करके राजा सिंह गहरे विचार में डूब गए। काफी सोच-विचार के बाद मन ही मन बोले, “कुछ करने की जरूरत नहीं है। दावे करने से काम चल जाएगा। मैं फिर से कह दूंगा कि जंगल में कोई कमी नहीं है। एक अच्छा भाषण दे दूंगा, काम बन जाएगा।”राजा सिंह ने तुरंत अपने भाषण लेखक कलकलिया कलमघसु को बुलाया और एक प्रेरणादायक भाषण लिखने का आदेश दिया। भाषण तैयार हुआ और राजा सिंह ने उसका वीडियो साझा किया। उन्होंने जंगलवासियों को इस स्थिति में क्या करना चाहिए, उसके पांच सूत्र बताए, “साथियो, मैं आज आपकी सभी समस्याओं का समाधान लेकर आया हूं। पहले किसी भी राजा ने आपकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, लेकिन मेरे पास अलग दृष्टि है और मैं उससे समाधान कर रहा हूं। आपको सिर्फ ये पांच सूत्र याद रखने हैं। आपकी सारी समस्याओं का हल इनमें है।read more:https://khabarentertainment.in/foundation-day-of-bharatiya-kisan-sangh-celebrated/सुनिए,शिकायत मत करो बारबार शिकायत करने से आपका मानसिक स्वास्थ्य खराब होगा। शिकायतें कमजोर मन की निशानी हैं। मन कमजोर होगा तो विकास कैसे होगा? जब हम विकसित जंगल के संकल्प की ओर बढ़ रहे हैं, तब शिकायतें हमारे विरोधियों को फायदा पहुंचाएंगी। हमें अपनी जरूरतों की कुर्बानी देनी होगी। जो नहीं मिलता, उसकी शिकायत मत करो।संतोषी बनो, जो मिलता है, उसमें खुशी ढूंढो। हम जो है उसकी कद्र नहीं करते। हमारे जंगल में गैस, ईंधन, चारा, पानी और दाने की कमी हो सकती है, लेकिन उसे उजागर मत करो। हवा तो मिलती है, उसका आनंद लो। इंटरनेट मिलता है, उसका उपयोग करो। रील्स बनाओ, रील्स देखो।शांति बनाए रखो, अगर आप असंतोष की शिकायत लेकर मेरे पास आएंगे, तो जंगल की शांति खतरे में पड़ जाएगी। हमारे जंगल की शांति की मिसाल विदेशी जंगलों में दी जाती है। अगर वहाँ पता चले कि हम अशांति फैला रहे हैं, तो हमारी हंसी उड़ाई जाएगी। इसलिए शांति बनाए रखो।धैर्य रखो, शांति के साथ धैर्य भी जरूरी है। अगर धैर्य नहीं होगा तो आप असंतुष्ट हो जाएंगे। जब चीजें या सुविधाएं न मिलें, तो धैर्य रखें और इंतजार करें। आज नहीं तो कल कुछ न कुछ जरूर होगा। धैर्य रखना सीख जाएंगे तो विकसित जंगल का सपना साकार होगा।सहनशील बनो, जब आप शिकायत नहीं करेंगे, शांति रखेंगे, संतोषी बनेंगे और धैर्य रखेंगे, तो आप अपने आप सहनशील बन जाएंगे। सहनशील बनने से कई समस्याएं अपने आप दूर हो जाती हैं। सहना सीख जाएंगे तो हमारे जंगल को विकसित बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।”राजा सिंह का वीडियो संदेश खत्म हुआ तो जंगलवासियों ने राहत की सांस ली। इसलिए नहीं कि उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान मिल गया था, बल्कि इसलिए कि यह राजा सिंह का अब तक का सबसे छोटा भाषण था। जंगलवासी मानते थे कि राजा सिंह का छोटा भाषण भी बड़ी राहत देता है।

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