सकारात्मक मनोबल से बनता है संगठन का भविष्य : किरण साह

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय के व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग में मंगलवार को ‘मनोबल एवं प्रेरणा: कार्यस्थल पर प्रदर्शन के निर्णायक आधार’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नेपाल से आए दो विद्वान शोधार्थियों ने विद्यार्थियों को कर्मचारियों के मनोबल, प्रेरणा, उत्पादकता और फंड प्रबंधन की व्यावहारिक समझ दी। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि दोनों वक्ता विभाग के पहले अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी हैं।कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के. रा. रा. ब. रामस्वरूप रामसागर बहुमुखी कैंपस, जनकपुरधाम, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल की सहायक प्रोफेसर सुश्री किरण कुमारी साह ने ‘मनोबल’ पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मनोबल कर्मचारियों की सामूहिक, मानसिक स्थिति, उत्साह, आत्मविश्वास, संतुष्टि और संगठन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है। यह केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि समूह के रूप में कार्य करने और संगठन से जुड़े रहने की क्षमता भी है। उन्होंने कहा कि जब कर्मचारियों में उच्च मनोबल होता है, तो वे अपने कार्य में रूचि लेते हैं, टीम के साथ बेहतर सहयोग करते हैं, समस्याओं का साहसपूर्वक समाधान करते हैं और संगठन के लक्ष्यों को अपना मानते हैं।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/इसके विपरीत निम्न मनोबल की स्थिति में असंतोष, निराशा, अनुपस्थिति, कार्य में रूचि की कमी और उत्पादकता में गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि फंड प्रबंधन में निवेशकों के धन का उचित, सुरक्षित और लाभकारी उपयोग किया जाता है। इसमें जोखिम, रिटर्न, बाजार की स्थिति और निवेश योजना का संतुलन बनाना आवश्यक होता है।कार्यशाला के दूसरे वक्ता पूजनारायण साह, प्रोजेक्ट मैनेजर, सेव द चिल्ड्रेन नेपाल ने ‘प्रेरणा’ विषय पर विद्यार्थियों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रेरणा का अर्थ है—किसी व्यक्ति को गति देना, प्रेरित करना या कार्य की ओर आगे बढ़ाना। मानव संसाधन प्रबंधन में यह प्रक्रिया कर्मचारियों की आवश्यकताओं, इच्छाओं, योग्यताओं और अपेक्षाओं को समझकर उन्हें खुशी एवं अधिक उत्पादकता से कार्य करने के लिए तैयार करना है।उन्होंने कहा कि प्रेरणा कोई जबरन थोपी गई प्रक्रिया नहीं है। यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारियों को उपयुक्त कार्य वातावरण, सम्मान, अवसर और सहयोग देकर उनकी आंतरिक ऊर्जा जगाई जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राकेश उपाध्याय ने कहा कि किरण कुमारी साह और पूजनारायण साह पीयू के व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग के पहले अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी हैं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुशील सिंह ने अतिथियों एवं सभी उपस्थित शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. अंजनी मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुशील सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रिंस सिंह, डॉ. नितिन चौहान सहित विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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