बड़हलगंज के नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय शिविर का रंगारंग समापन बुधवार को हो गया। समापन समारोह की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती व स्वागत गीत से हुई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी की हिंदी विभाग की आचार्या डॉ. अचला पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे शिविरों से सेवा, सहानुभूति और अनुशासन की भावना विकसित होती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि यह शिविर का समापन हो सकता है, लेकिन सेवा का नहीं, क्योंकि सेवा जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है।डॉ. पांडेय ने आगे कहा कि NSS हमारे भीतर त्याग, सेवा और समर्पण का भाव पैदा करता है, जिससे हम आंतरिक स्तर पर समृद्ध बनते हैं। यही समृद्धि परपीड़ा, सहानुभूति और कर्तव्य भाव जगाती है। उन्होंने जोर दिया कि जीवन में केवल सफल होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका सार्थक होना भी आवश्यक है, और NSS इसी सार्थकता पर बल देता है।इस अवसर पर वक्ता राजेश पांडेय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यावहारिक होना चाहिए और NSS के शिविर व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने का मंच हैं। प्राचीन इतिहास के डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने NSS शिविरों की तुलना प्राचीन गुरुकुल प्रणाली से करते हुए कहा कि जिस प्रकार गुरुकुल बच्चों को आत्मनिर्भर बनाते थे, उसी तरह NSS शिविर स्वयंसेवकों को शारीरिक और मानसिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार पांडेय ने स्वयंसेवकों के चेहरों पर दिख रही दीप्ति और विश्वास को शिविर की सफलता का प्रतीक बताया। उन्होंने स्वयंसेवकों से शिविर में मिली सीख को जीवन में आगे ले जाने का आह्वान किया। इससे पूर्व, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. त्रिपुरेश कुमार त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया और सात दिवसीय शिविर की गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। डॉ. त्रिपुरेश ने कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय कुमार सिंह ने किया।