स्नेहा सिंह -86 साल के आयातोल्लाह खामेनेई अपने आफिस में कितने बजे आएंगे, उनके साथ मीटिंग में कौन-कौन उपस्थित रहेगा, यह पूरी और पुख्ता जानकारी मिलने के बाद शनिवार सुबह तय समय पर हमला करने की योजना बनाई गई।दुनिया की दूसरी सभी जासूसी एजेंसियों की तुलना में मोसाद के काम करने का तरीका बहुत अलग और आधुनिक है। वह ऐसे अभियानों को अंजाम देती है, जिनकी कल्पना करना भी दूसरों के लिए मुश्किल होता है।ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे त्रिकोणीय संघर्ष में किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन एक बात फिर साबित हो गई है कि जासूसी की दुनिया में इजरायली खुफिया संस्था मोसाद की बराबरी करना आसान नहीं है।ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले ही जिस तरह वहां के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह खामेनेई की हत्या की गई, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।read more :https://khabarentertainment.in/former-state-minister-thakur-yashpal-singh-passes-away-wave-of-mourning-in-the-area/ 28 फरवरी की उस घटना के दिन ईरान सरकार और सेना के सर्वोच्च अधिकारियों के वफादार ड्राइवर तेहरान की पेस्टुर स्ट्रीट पर अपनी कारें पार्क करके आगे के आदेश का इंतजार कर रहे थे। उसी समय ऊपर आसमान में घूम रहे अमेरिका और इजरायल के जासूसी उपग्रह उन पर कड़ी नजर रखे हुए थे।उस दिन तेहरान के सभी रास्तों के ट्रैफिक सीसीटीवी कैमरे इजरायल द्वारा हैक कर लिए गए थे। इन कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों की जानकारी तेल अवीव स्थित कंप्यूटर सर्वर तक पहुंच रही थी। एक रिपोर्ट यह भी बताती है कि पिछले एक साल से तेहरान के सभी ट्रैफिक कैमरों का अप्रत्यक्ष संचालन मोसाद की एक खास टीम कर रही थी।इस व्यवस्था के माध्यम से मोसाद को यह जानकारी मिलती रहती थी कि ईरान के कौन-कौन से शीर्ष अधिकारी या सैन्य अधिकारी किस समय कहां जाते हैं। इसी जानकारी के जरिए ईरान सरकार के हर महत्वपूर्ण व्यक्ति की पल-पल की गतिविधियों का पता इजरायल को चलता रहता था।इतना ही नहीं, जिन गुप्त ठिकानों पर सर्वोच्च अधिकारी मिलते थे, उनका समय, रोज का रूटीन, उनके नाम-पते, काम के घंटे, आने-जाने के रास्ते आदि की भी बेहद सूक्ष्म जानकारी मोसाद ने हासिल कर ली थी। लगभग एक साल तक इस तरह जानकारी इकट्ठा करने के बाद आखिरकार ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को खत्म करने की योजना बनाई गई।
लेकिन केवल इतनी जानकारी के आधार पर तेहरान के उस गुप्त ठिकाने पर हमला करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा होता।read more:https://khabarentertainment.in/former-state-minister-thakur-yashpal-singh-passes-away-wave-of-mourning-in-the-area/
यह बात मोसाद के एजेंट अच्छी तरह जानते थे। इसलिए उन्होंने खामेनेई को खत्म करने की योजना एक साल पहले ही बना ली थी।मोसाद के कुछ एजेंट, जो मेडिकल डिग्रीधारी डाक्टर थे, उन्होंने तेहरान में दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) के रूप में अपनी पहचान बना ली। धीरे-धीरे उन्होंने ईरान की विशेष कमांडो फोर्स इस्लामिक रिपब्लिक गार्ड कार्प्स के कुछ शीर्ष अधिकारियों से घनिष्ठ संबंध बना लिए।उनके पास इलाज के लिए आने वाले ईरान के मंत्रियों, सैन्य अधिकारियों और सरकारी अफसरों में से कुछ खास व्यक्तियों के दांतों में मोसाद के एजेंटों ने गुप्तरूप से ट्रैकिंग चिप लगा दी। इस बेहद सूक्ष्म माइक्रोचिप से मिलने वाले सिग्नल के जरिए मोसाद के एजेंट सारी जानकारी हासिल करते रहते थे।इन जानकारियों का विश्लेषण मोसाद की विशेष टीम यूनिट 8200 करती थी और रिपोर्ट तैयार करती थी। घटना वाले दिन भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।86 वर्षीय आयातोल्लाह खामेनेई अपने आफिस में कितने बजे आएंगे और उनके साथ बैठक में कौन-कौन उपस्थित रहेगा, इसकी पूरी जानकारी मिलने के बाद शनिवार सुबह निर्धारित समय पर हमला करने की योजना बनाई गई। और आखिरकार ट्रम्प और नेतन्याहू के संयुक्त आदेश मिलने के बाद शनिवार 28 फरवरी को खामेनेई का काम तमाम कर दिया गया।मोसाद के कई जासूसी कारनामों ने विश्व इतिहास को महत्वपूर्ण मोड़ दिए हैं।1961-62 में रूस ने अपने नए मिग-21 लड़ाकू विमान मिस्र, इराक और सीरिया को बेचे। इससे इजरायल चिंतित हो गया।read more:https://khabarentertainment.in/former-state-minister-thakur-yashpal-singh-passes-away-wave-of-mourning-in-the-area/ यदि ये विमान उसके दुश्मन देशों को मिल जाते तो उनकी सैन्य शक्ति बढ़ जाती।इजरायल ने स्थिति को बदलने के लिए फ्रांस से अधिक शक्तिशाली मिराज विमान खरीदे। लेकिन रूसी मिग-21 को देखने-परखने की उनकी इच्छा खत्म नहीं हुई। इसलिए उन्होंने आपरेशन डायमंड शुरू किया।इस मिशन के लिए मोसाद की एक चतुर महिला एजेंट को जिम्मेदारी दी गई, जाओ और इराक से मिग-21 विमान उड़ाकर ले आओ।वह एजेंट बगदाद पहुंची। उसने मिग-21 उड़ाने वाले इराकी पायलटों की सूची तैयार की। इस सूची में एक पायलट मुनीर रफ्दा था, जो मूलरूप से सीरियाई ईसाई था।मोसाद की महिला एजेंट ने कई महीनों तक उससे दोस्ती की। अंत में उसने प्रस्ताव रखा कि यदि वह मिग-21 को तेल अवीव पहुंचा दे तो बदले में उसे एक लाख डालर, बंगला, इजरायली नागरिकता और उसके पूरे परिवार को सम्मान के साथ बसने की सुविधा दी जाएगी।कैप्टन रफ्दा तैयार हो गया और इस तरह आपरेशन डायमंड सफल हो गया।27 जून, 1976 को एयर फ्रांस फ्लाइट 139 में 248 यात्रियों के साथ उड़ान भरते ही फिलिस्तीनी हाइजैकर्स ने उसे अगवा कर लिया। उन्होंने मांग की कि इजरायल में बंद 40 फिलिस्तीनी कैदियों तथा केन्या, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड और जर्मनी में बंद 13 कैदियों को रिहा किया जाए।उन्होंने यह धमकी भी दी कि यदि 1 जुलाई तक उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे यात्रियों को मारना शुरू कर देंगे।इजरायल सरकार ने वार्ता के बहाने समयसीमा 4 जुलाई तक बढ़वा ली और इसी बीच 3 जुलाई को ब्रिगेडियर जनरल डैन शोमरॉन के नेतृत्व में आपरेशन एंटेब्बे नाम से बचाव अभियान शुरू करने की अनुमति दे दी।हवाई अड्डे पर उतरते ही इजरायली कमांडो ने हमला कर दिया और तीन हाइजैकर्स मारे गए। केवल 30 मिनट चले इस आपरेशन में सभी यात्रियों को बचा लिया गया और बाद में उन्हें नैरोबी के रास्ते इजरायल ले जाया गया।मोसाद का एक और बड़ा अभियान था, नाजी नरसंहार के मुख्य योजनाकार एडोल्फ आइखमैन को पकड़ना।1960 में मोसाद ने पता लगाया कि वह अर्जेंटीना में छिपा हुआ है। 11 मई,1960 को ब्यूनस आयर्स के एक उपनगर से मोसाद और शबाक एजेंसी की टीम ने उसे पकड़ लिया और 21 मई, 1960 को उसे इजरायल ले जाया गया।इसके बाद 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में इजरायली खिलाड़ियों की हत्या करने वाले फिलिस्तीनी संगठन ब्लैक सितंबर के आतंकवादियों को एक-एक कर खत्म करने का अभियान चलाया गया।इस अभियान में मुख्य साजिशकर्ता अली हसन सलामेह को खोजने में तीन साल लगे। 22 जनवरी, 1979 को बेरूत में एक कार बमविस्फोट के जरिए उसे मार दिया गया।मोसाद की एक और प्रसिद्ध कार्रवाई हथियारों के दलाल अबू नाज़र के खिलाफ थी।1984 में स्विस एयर की उड़ान में दो महिला एजेंट एयर होस्टेस बनकर सवार हुईं। उन्हें पता था कि नाजर शराब पीने का शौकीन है। उन्होंने शराब में विशेष प्रकार का जहर मिलाकर उसे पिला दिया।जब विमान 32,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, नाजर अपनी सीट पर ही सो गया और उसके सांस हमेशा के लिए रुक गए।बेरूत हवाई अड्डे पर विमान उतरते ही दोनों एयर होस्टेस चुपचाप अपना यूनिफार्म बदलकर भीड़ में गायब हो गईं।