चाइनीज जेएफ-17 से ज्यादा कबाड़ा निकला……..ट्रंप का स्‍टील्‍थ फाइटर जेट एफ-35

भारत को इस कबाड़ को बेचने एड़ीचोटी का जोर लगा चुके ट्रंप

नई दिल्ली । वर्तमान में जारी ईरान युद्ध में अमेरिका को इसतरह के जख्‍म मिल रहे हैं, जिन्‍हें आने वाली पीढ़ियां जल्‍द भुला नहीं सकेंगी। अमेरिका और इजरायल ने जिस ईरान के डिफेंस सिस्‍टम को कमजोर माना था, अब उसी के सामने दुनिया के सबसे ताकतवर देश की सेना पस्‍त हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ जंग में अभी तक अमेरिका के 16 फाइटर जेट या फिर ड्रोन तबाह हो चुके हैं। कुछ रिपोर्ट में यह संख्‍या 20 तक आंकी गई है। अब ईरान द्वारा अमेरिका की पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ फाइटर जेट एफ-35 को इंटरसेप्‍ट कर उस पर अटैक किया।इस अटैक के बाद अमेरिकी सुपरजेट को इमर्जेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि इस घटना में पांचवी पीढ़ी जेनरेशन के जेट को व्‍यापक नुकसान पहुंचा है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब एफ-35 की ऐसी दुर्गति हुई है। बीते 8 साल में कम से कम 11 ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें एफ-35 को नुकसान उठाना पड़ा है। दिलचस्‍प बात यह है कि यह वहीं फाइटर जेट है, जिसे भारत को बेचने के लिए राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने काफी कोशिश की। हालांकि, इस लेकर अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया गया है, लेकिन एफ-35 के दुर्घटनाग्रस्‍त या फिर हिट करने की घटनाओं को देखकर ये चाइनीज फाइटर जेट जेएफ-17 जैसा ही कबाड़ लगता है। दरअसल, भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ फाइटर जेट की जरूरत है, क्‍योंकि चीन पांचवी पीढ़ी के जेनरेशन का लड़ाकू विमान तैयार कर चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन इस विमान को पाकिस्‍तान को भी बेच सकता है। इसके बाद भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि उसके पास भी पांचवीं पीढ़ी की तकनीक हो। इस रेस में अमेरिकी एफ-35 के साथ ही रूसी एसयू-57 फाइटर जेट शामिल है। हालांकि, इंडियन सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्ट्स की ओर से कई बातों को उजागर किया है। इसमें सबसे अहम टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर और वेपन इंटीग्रेशन का मुद्दा है। लेकिन, अब एफ-35 की स्‍टील्‍थ कैपेबिलिटी और हार्डवेयर की कमी का मसला भी सामने आया है। ईरान ने जिस तरह से एफ-35 को इंटरसेप्‍ट कर हिट किया, उससे एक और सवाल उठ खड़ा हुआ है। अमेरिका ने पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 फाइटर जेट को अभी तक कई देशों को बेच चुका है। इसमें से यूरोपीय के साथ ही अरब जगत के भी कुछ देश शामिल हैं। अमेरिकी डिफेंस कंपनी और एफ-35 की निर्माता फर्म लॉकहीड मार्टिन इस लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जिस तरह से इस जेट ने जमीन को कई एक बार चूमा है, उससे उन दावों पर भरोसा करना काफी मुश्किल है। टेस्‍ला चीफ एलन मस्‍क भी इसपर गंभीर सवाल उठा चुके हैं। बता दें कि चीन की मदद से पाकिस्‍तान जेएफ-17 फाइटर जेट तैयार कर रहा है। पिछले दिनों इस बेचने को लेकर कई अरब डॉलर के करार के भी दावे किए। हालांकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है कि पाकिस्‍तान ने कितने जेएफ-17 लड़ाकू विमान ब्रिकी किए हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम ने जेएफ-17 को सफलतापूर्व इंटरसेप्‍ट कर मार गिराया था। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने उसी दिन वीडियो जारी कर दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने एफ-35 को निशाना बनाकर गंभीर नुकसान पहुंचाया। ईरान के ये सिस्टम रडार के बजाय इंफ्रारेड सेंसर का इस्तेमाल करते हैं, जो स्टील्थ विमान की गर्मी को ट्रैक कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *