बाराबंकी। गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कांग्रेस की दिग्गज नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री मोहसिना किदवई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मोहसिना किदवई अन्तिम कांग्रेसी थी। उनके बाद सिर्फ़ नाम की कांग्रेस पार्टी तो रहेगी, पर नेहरू और इन्दिरा का गढ़ा कोई कांग्रेसी नहीं होगा। वे हमेशा पद के अहंकार से सदैव बचकर रही। वह लोकतांत्रिक मान्यताओ में रची राजनेता थी। उनका व्यक्तित्व पद का मोहताज नही था। विनम्र, शालीन, व्यवहारकुशल और मृदुभाषी मोहसिना किदवई का जाना मेरे लिए निजी शोक है। दुखी हूँ मैने अपना एक अभिभावक और शुभचिन्तक खो दिया है। अपनी इन्हीं खासियतों के कारण उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के बड़ागांव से निकल मोहसिना किदवई की लोकप्रियता का दुर्ग उत्तर प्रदेश बना। उनसे सहमत और असहमत हुआ जा सकता है पर उत्तर प्रदेश व देश की राजनीति में वे अपने समय की अग्रणी नेता थीं। उनके निधन से कॉंग्रेस में निष्ठा और समर्पण के एक युग का अन्त हुआ है। साथ ही जिले में वैचारिक और मूल्य आधारित राजनीति का पटाक्षेप हो गया। श्री शर्मा ने कहा कि मोहसिना किदवई ने अपने कार्यकाल में बाराबंकी को विकास की गति प्रदान की। उन्होंने जिले में सूत मिल, आईपीएल जैसी फैक्ट्रियों का सृजन किया ताकि युवाओं को रोजगार मिले। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जमील उर रहमान किदवई की स्मृति में स्कूल बनाया। साल 2022 में गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा मोहसिना किदवई को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। उन्होंने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश का महासंघ बने इस विचार को काफी सराहा। वे मेरे लिए राजनेता नही बल्कि परिवार का ही एक हिस्सा थी। उनके पति खलील उर रहमान किदवई मेरे अभिन्न मित्र और शुभचिन्तक थे। मोहसिना किदवई ने कई बार केंद्रीय मंत्री और सांसद के रूप में देश की सेवा की है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।