नई दिल्ली।देश के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम गंभीर समस्या बन गई है, जिसका असर केवल यातायात तक सीमित नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और लोगों की उत्पादकता पर दिख रहा है। एक अनुमान के अनुसार दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में हर साल करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान ट्रैफिक जाम के कारण होता है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ, तब सिर्फ दिल्ली में ही 2030 तक सालाना 14.6 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, जिसमें ईंधन और मानव संसाधन की बर्बादी शामिल है। इस समस्या की बड़ी वजह निजी वाहनों की बढ़ती संख्या है, लेकिन मूल कारण सार्वजनिक परिवहन, खासकर बस सेवाओं की खराब स्थिति है। बसों की संख्या कम है और वे निर्धारित समय पर नहीं चल पातीं, क्योंकि उनके लिए अलग लेन नहीं होती। इससे यात्रियों को यात्रा का सही समय अनुमानित नहीं हो पाता। यदि बसों के लिए अलग लेन (लेन सिस्टम) लागू किया जाए, तब वे मेट्रो की तरह भरोसेमंद बन सकती हैं। अहमदाबाद का बीआरटी (बस रैपिड ट्रांजिट) मॉडल इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है।read more:https://khabarentertainment.in/143-beneficiaries-in-barhalganj-received-the-benefit-of-the-pm-housing-scheme/ यहां बने बीआरटी कॉरिडोर में बसों की औसत गति 25–30 किमी प्रति घंटा रहती है, जो मेट्रो की औसत गति (लगभग 35 किमी/घंटा) के काफी करीब है। इससे यात्रा का समय 20–30 प्रतिशत तक कम हो जाता है और ईंधन की भी बचत होती है। इसकी लागत भी मेट्रो के मुकाबले काफी कम होती है, लगभग 10 से 40 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर। इस मॉडल का एक और बड़ा फायदा यह है कि करीब 22 प्रतिशत लोगों ने निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन अपनाया है। इस तरह के सफल बीआरटी सिस्टम सूरत और राजकोट में भी देखने को मिलते हैं। हालांकि, इसतरह के कॉरिडोर उन्हीं सड़कों पर प्रभावी होते हैं जिनकी चौड़ाई कम से कम 24 से 30 मीटर हो। साथ ही, बस लेन को इस तरह डिजाइन करना जरूरी है कि उसमें अन्य वाहन प्रवेश न कर सकें। वहीं, दिल्ली में बीआरटीएस का अनुभव असफल रहा, जिसका कारण संकरी सड़कों पर निर्माण, भीड़भाड़ वाले चौराहों पर उचित ढांचे की कमी और कमजोर एन्फोर्समेंट था। इन गलतियों से सीख लेकर यदि अन्य शहरों में बेहतर योजना और क्रियान्वयन के साथ बीआरटी सिस्टम लागू किया जाए, तब ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।