अधूरा सड़क निर्माण बना मुसीबत: नूरपुर–गोहावर मार्ग पर हादसों का खतरा

नूरपुर। जनपद बिजनौर के नूरपुर क्षेत्र में ठेकेदार की लापरवाही से जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नूरपुर–मुरादाबाद मार्ग से गोहावर–हल्लु मार्ग (लगभग 540 मीटर) पर किया गया निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।स्वीकृत धन, अधूरा काम यह सड़क निर्माण कार्य माननीय विधायक राम अवतार सैनी के प्रयासों से स्वीकृत हुआ था। लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 54.36 लाख रुपये की लागत से विशेष मरम्मत कार्य कराया जाना था। ठेकेदार ने सड़क पर सीसी (कंक्रीट) डालने का कार्य तो कर दिया, लेकिन उसके किनारों पर न तो मिट्टी भरी गई और न ही इंटरलॉकिंग बिछाई गई। यही अधूरापन अब जनता के लिए बड़ी समस्या बन गया है।सड़क बनी हादसों का कारण ग्राम प्रधान निधि राज सिंह के अनुसार, सीसी रोड और कच्चे हिस्से के बीच बने ऊँचे-नीचे टक्कर (लेवल डिफरेंस) के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।read more:https://worldtrustednews.in/home-buying-surges-14-year-record-broken-in-march-%e2%82%b91492-crore-deposited-in-government-coffers/  व्यस्त मार्ग, बढ़ता खतरा भारतीय किसान यूनियन (भानू) के प्रदेश सचिव सत्येंद्र कुमार चौहान का कहना है कि यह मार्ग अत्यंत व्यस्त है। गोहावर में 4 इंटर कॉलेज और 2 जूनियर हाई स्कूल संचालित हैं। प्रतिदिन लगभग 3000–3500 छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से गुजरते हैं। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, सहकारी समितियां और बैंक भी स्थित हैं। करीब 15,000 की आबादी और आसपास के 50 गांवों का मुख्य बाजार यहीं है। ऐसे में इस मार्ग को अधूरा छोड़ना सीधे-सीधे लोगों की जान जोखिम में डालना है।जनता में आक्रोश स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार लंबे समय से गायब है और कोई सुनवाई नहीं हो रही। आरोप है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जबकि आम जनता को इसकी कीमत अपनी सुरक्षा और असुविधा के रूप में चुकानी पड़ रही है।प्रशासन से मांग क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अधूरे कार्य को तुरंत पूरा कराया जाए। सड़क किनारों पर मिट्टी भराई और इंटरलॉकिंग जल्द कराई जाए। जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यह मामला न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लापरवाही किस तरह आम जनजीवन को प्रभावित करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।

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