हिन्दी अकादमी दिल्ली ने किया प्रसिद्ध लेखिका डॉ. पारुल तोमर की “पाण्डु लिपि“ गाँव से लौटते हुए“का चयन 

बिजनौर ।जनपद के गांव हिसामपुर की प्रसिद्ध कवयित्री एवं कलाकार डॉ. पारुल तोमर की पुस्तक गांव से लौटते हुए की पांडुलिपि का चयन दिल्ली सरकार की “हिन्दी अकादमी”ने पुस्तक प्रकाशन सहयोग योजना के अंतर्गत किया है। उनकी पांडुलिपि का प्रकाशन भी दिल्ली के किताब घर से हो गया।डॉ० पारुल तोमर का जन्म जनपद बिजनौर के तहसील चांदपुर अंतर्गत गांव हिसामपुर के कृषक परिवार में हुआ। वह अपने पिता महावीर सिंह तोमर एवं माता भारती तोमर की इकलौती संतान हैं। वह साहित्य के साथ-साथ चित्रकला में भी समान रूप से सक्रिय हैं।शैक्षिक क्षेत्र में भी उनकी सृजनात्मक उपस्थिति उल्लेखनीय है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा भारत में प्रकाशित तथा एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या (2022–23) के अंतर्गत सी.बी.एस.ई. एवं आई.सी.एस.ई. पाठ्यक्रम की कक्षा 6 की हिन्दी पाठ्य पुस्तक ‘अंकुर माला’ में उनकी कविता ‘सजा तिरंगा चांद पर’ तथा सी. बी. एस. ई. तथा आई.सी. एस. ई. के पाठ्यक्रम हेतु कक्षा सात की हिन्दी विषय की पाठ्य पुस्तक ‘वाणी ‘ में एक आलेख ‘ अनुशासन और नियंत्रण ‘ को शामिल किया जाना उनकी रचनात्मक प्रतिभा का प्रमाण है।अपनी चयनित पुस्तक ‘गांव से लौटते हुए’ के परिप्रेक्ष्य में डॉ. पारुल तोमर ने बताया कि उक्त नवीनतम पुस्तक में विविध विषयों पर आधारित कविताएं हैं। जिनमें समाज का संवेदनशील और यथार्थ चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि  मेरी कविताओं में लोक संस्कृति, लोक जीवन का प्रतिबिंब होना स्वाभाविक है। इन्हें पढ़कर यदि एक भी मुरझाया चेहरा खिलता है तो उनके लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।जिस ग्रामीण अंचल में वे जन्मी और पली-बढ़ीं उसके आचार-विचारों से वे अलग नहीं रह सकतीं। उन्होंने जो देखा, सुना, जिया और सीखा, उसी के साथ एक सुंदर समाज की कल्पना को रंगों और शब्दों के माध्यम से काग़ज़ पर उतारने का प्रयास किया है।

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