समय पर पहचान और सही देखभाल से माँ और शिशु दोनों रह सकते हैं सुरक्षित
फतेहपुर। हसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सभागार में स्वास्थ्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपम सिंह की अगुवाई में जेस्टेशनल डायबिटीज दिवस के अवसर पर जपाईगो संस्था के सहयोग से गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई।गोष्ठी के दौरान स्टाफ नर्स रीना मौर्य ने महिलाओं को जागरूक करते हुए बताया कि गर्भावस्था के दौरान समय पर पहचान और सही देखभाल से माँ और शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिसे गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस – जीडीएम) कहा जाता है। यह समस्या माँ और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए इसकी समय पर जांच और देखभाल बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ओजीटीटी (ओरल ग्लूकोस टॉलरेंस टेस्ट) की जांच दो बार करानी चाहिए। विशेष रूप से 24 से 28 सप्ताह के बीच दूसरी ओजीटीटी जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए तो संतुलित आहार, हल्का नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. सिंह ने बताया कि गर्भकालीन मधुमेह होने पर शिशु का वजन अधिक होने, प्रसव के समय जटिलताएं बढ़ने, समय से पहले प्रसव तथा अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा माँ को भविष्य में मधुमेह होने का खतरा भी बढ़ सकता है। उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित एएनसी जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर शुगर की जांच अवश्य करवाएं, ताकि माँ और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकें।
इस अवसर पर कुशल सिंह, सोशल सिंह (एल.टी.), जावेद आलम (बीसीपीएम), कैलाश नाथ, अनिल मौर्या, वीर बहादुर सिंह, अमन कुमार, कमलेश कुमार और बैजनाथ सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।