स्नेहा सिंह -जंगल में एक दिन बड़ा ही रोचक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जंगल के सभी जानवर उत्साह से भरे हुए थे। मंच सजा था, रंग-बिरंगी पताकाएं लहरा रही थीं और चारों ओर खुशियों का माहौल था। आज ‘जंगल रत्न विज्ञान पुरस्कार’ की घोषणा होनी थी।लोमड़ी मैडम ने मुस्कराते हुए कहा, “इस वर्ष का पुरस्कार जाता है गप्पू बंदर को।”यह सुनते ही तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। शेर महाराज ने स्वयं गप्पू को मंच पर बुलाया और उसे ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। गप्पू की आंखों में चमक थी और चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान।दरअसल, गप्पू हमेशा सोचता रहता था कि जब भी मैं पेड़ से कोई फल तोड़कर छोड़ देता हूं, तो वह नीचे ही क्यों गिरता है? ऊपर क्यों नहीं जाता?read more:https://pahaltoday.com/21st-central-monitoring-committee-reviews-state-wise-progress-on-polluted-river-stretches-and-sewage-management/
उसकी यही जिज्ञासा उसे बाकी सब से अलग बनाती थी। एक दिन उसने देखा कि पेड़ से गिरा आम जमीन पर ही आकर रुका। उसने पत्थर और पंख को भी गिराकर देखा। दोनों नीचे ही आए, भले ही गति अलग-अलग थी। गप्पू ने सोचा कि जमीन में जरूर कोई अदृश्य शक्ति है, जो सबको अपनी ओर खींचती है।वह रोज नए-नए प्रयोग करता। कभी ऊंचाई से कंकड़ गिराता, तो कभी पत्ते। उसने जल्दी ही यह समझ लिया कि धरती में कोई विशेष आकर्षण है। उसने अपने निष्कर्ष जंगल के सभी जानवरों के सामने रखे।शेर महाराज उसकी बात ध्यान से सुन कर बोले, “गप्पू, तुमने बहुत बड़ा रहस्य खोजा है। यह शक्ति ‘गुरुत्वाकर्षण’ कहलाती है। धरती हर वस्तु को अपनी ओर खींचती है, इसलिए सभी चीजें नीचे गिरते हैं।”सभी जानवर आश्चर्यचकित रह गए। खरगोश बोला, “वाह, इसीलिए हम जमीन पर टिके रहते हैं।”हिरण ने कहा, “अब समझ आया कि चीजें हवा में उड़कर गायब क्यों नहीं हो जातीं।”गप्पू की मेहनत और जिज्ञासा ने उसे जंगल का सबसे होनहार वैज्ञानिक बना दिया। उस दिन से सभी जानवरों ने ठान लिया कि वे भी हर बात को समझने की कोशिश करेंगे और सवाल पूछने से कभी नहीं डरेंगे।सच्ची जिज्ञासा और लगातार प्रयास से ही ज्ञान की खोज होती है। छोटा हो या बड़ा, सवाल पूछने वाला ही सच्चा खोजकर्ता बनता है।