Dr.Suresh Kumar Mishra:यदि आपको लगता है कि इस दुनिया में ‘धैर्य’ का अंतिम अध्याय हिमालय की गुफाओं में लिखा जाता है, तो आप गलत हैं। धैर्य की असली पराकाष्ठा तो उस समय दिखती है जब एक आम भारतीय नागरिक अपने ‘इंटरनेट’ के न चलने की शिकायत करने के लिए ‘कस्टमर केयर’ को फोन लगाता है। यह वह प्रेम-प्रसंग है जिसमें प्रेमी तड़पता रहता है और प्रेमिका केवल रिकॉर्डेड संगीत सुनाकर उसे बहलाती रहती है। हमारे मोहल्ले के ‘बनवारी लाल’ जी का वाई-फाई पिछले तीन दिनों से ‘कोमा’ में था। उन्होंने हिम्मत जुटाई और कंपनी के नंबर पर डायल किया। उधर से एक सुरीली, मगर निर्जीव आवाज आई— “नमस्ते! हमारे सभी ‘एग्जीक्यूटिव’ अभी दूसरे ग्राहकों की सेवा में व्यस्त हैं। आपकी कॉल हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”बनवारी लाल जी को लगा कि शायद उनकी ‘महत्ता’ का मूल्यांकन अभी होने वाला है। लेकिन अगले ही पल एक ऐसा संगीत शुरू हुआ जो न तो पूरी तरह शास्त्रीय था और न ही पॉप। वह उस बांसुरी की आवाज थी जिसे सुनकर शायद सांप भी अपना बिल छोड़कर भाग जाए, पर ग्राहक को वह मजबूरी में सुननी ही पड़ती है।read more :https://pahaltoday.com/department-of-commerce-organizes-stakeholder-consultation-meeting-to-ensure-trade-continuity-amid-emerging-geopolitical-developments/
Dr.Suresh Kumar Mishra:बनवारी लाल जी ने भी तर्क दिया, “भाई, ये संगीत नहीं, ये तो हमारी बेबसी का बैकग्राउंड म्यूजिक है!”दस मिनट बीते। संगीत की धुन बदली। अब सितार बजने लगा। बनवारी लाल जी को लगा कि अब शायद कोई इंसान बोलेगा। पर फिर वही सुरीली आवाज— “धैर्य बनाए रखें, आप कतार में ‘सातवें’ नंबर पर हैं।” बनवारी लाल जी को अपनी शिक्षा पर शक होने लगा। उन्हें लगा कि शायद वे ‘कस्टमर केयर’ को नहीं, बल्कि ‘मोक्ष’ प्राप्ति के लिए स्वर्ग की लाइन में लगे हैं, जहाँ सातवें नंबर का मतलब है—अगले जन्म तक की प्रतीक्षा।आधे घंटे बाद, जब बनवारी लाल जी का फोन गर्म होकर तवे जैसा हो गया और उनके कान का आकार फोन के स्पीकर जैसा हो गया, तब अचानक संगीत रुका। एक कर्कश आवाज आई— “हेलो, मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ?”बनवारी लाल जी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने अपनी पूरी व्यथा सुनाई—कैसे उनका नेट नहीं चल रहा, कैसे उनका पोता ऑनलाइन क्लास नहीं ले पा रहा।read more:https://pahaltoday.com/department-of-commerce-organizes-stakeholder-consultation-meeting-to-ensure-trade-continuity-amid-emerging-geopolitical-developments/
Dr.Suresh Kumar Mishra:उधर से जवाब मिला— “क्षमा करें सर, आपका फोन गलत विभाग में लग गया है। मैं आपको ‘टेक्नीकल टीम’ को ट्रांसफर कर रहा हूँ। कृपया लाइन पर बने रहें।” और फिर… वही बांसुरी! वही तड़प! बनवारी लाल जी को लगा जैसे वे किसी प्राचीन मंदिर के गर्भगृह के सामने खड़े हैं, जहाँ पुजारी कह रहा है कि ‘देवता’ अभी सो रहे हैं, तुम बाहर बैठकर कीर्तन सुनो।पूरे दो घंटे बीत गए। बनवारी लाल जी अब संगीत के इतने आदि हो चुके थे कि वे खुद भी उस धुन पर गुनगुनाने लगे थे। उन्हें लगने लगा था कि अब उनका रिश्ता उस ‘होल्ड म्यूजिक’ से गहरा हो गया है। तभी अचानक कॉल कट गई।बनवारी लाल जी ने फिर से डायल किया। इस बार जैसे ही घंटी बजी, उधर से आवाज आई— “सर, आपकी पिछली कॉल के फीडबैक के लिए यह सर्वे है। हमारी सेवाओं से आप कितने संतुष्ट हैं? 1 दबाएँ यदि बहुत संतुष्ट हैं…”बनवारी लाल जी ने बड़े शांत भाव से ‘1’ दबाया। उनकी पत्नी ने हैरान होकर पूछा, “अरे! नेट तो ठीक हुआ नहीं, तुमने ‘संतुष्ट’ क्यों लिखवाया?”बनवारी लाल जी ने दार्शनिक अंदाज में कहा, “अरी भाग्यवान, मैं सेवा से संतुष्ट नहीं हूँ, मैं तो इस बात से खुश हूँ कि दो घंटे तक उन्होंने मुझे मुफ्त में वो संगीत सुनाया जो सुनकर मुझे समझ आ गया कि— ‘इंतजार का फल मीठा नहीं, बल्कि ‘साइलेंट’ होता है।’ वैसे भी, नेट नहीं चल रहा तो क्या हुआ, आज दो घंटे बाद मुझे पता चला कि मेरा बीपी अब ‘म्यूजिक प्रूफ’ हो चुका है!” —