डिजिटल एडिक्शन से बच्चों की आत्महत्या के मामले बढ़े

नई दिल्ली। राज्यसभा में डिजिटल एडिक्शन का मुद्दा गंभीरता से उठाया गया, जिसमें बच्चों और युवाओं में बढ़ती मोबाइल लत पर चिंता जताई गई।चर्चा के दौरान दावा किया गया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के दबाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक कई बच्चे रोजाना 7 से 8 घंटे मोबाइल पर बिता रहे हैं, जिससे पढ़ाई, सामाजिक जीवन और नींद प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लत अवसाद, चिंता और अकेलेपन की भावना को बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि बच्चे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। सदस्यों ने सरकार से इस विषय पर व्यापक चर्चा और ठोस नीति बनाने की मांग की है। साथ ही अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद करने की सलाह दी गई है।

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