नई दिल्ली। भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक और भावुक फैसले में कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर रैंक पर पदोन्नत करने की मंजूरी दे दी है।यह फैसला कर्नल पुरोहित के लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के करीब दो दशक कानूनी लड़ाइयों और जेल की सलाखों के पीछे बिताए हैं। 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद उनका चमकता हुआ सैन्य करियर पूरी तरह पटरी से उतर गया था। हालांकि, लंबी कानूनी जंग के बाद अब सेना ने उन्हें उनका हक देने का फैसला किया है। कर्नल पुरोहित मूल रूप से 31 मार्च, 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उनकी किस्मत ने तब करवट ली जब सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी रिटायरमेंट पर रोक लगा दी। ट्रिब्यूनल ने माना कि पुरोहित के साथ न्याय होना बाकी है। 31 जुलाई, 2025 को मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया था, जिसके बाद उनके प्रमोशन का रास्ता साफ हुआ। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उनके खिलाफ सबूतों का अभाव है और अभियोजन पक्ष की कहानी विरोधाभासों से भरी थी। सेना के सूत्रों का कहना है कि यह प्रमोशन कर्नल पुरोहित के उन खोए हुए सालों की भरपाई है जो उन्होंने ट्रायल के दौरान गंवा दिए। यदि यह विवाद न होता, तो वे अब तक मेजर जनरल के पद तक पहुंच चुके होते। उनके बैच के साथी आज सेना में शीर्ष नेतृत्व संभाल रहे हैं। इस प्रमोशन के बाद अब वे ब्रिगेडियर के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। एक समय में आतंकी कहे जाने वाले अधिकारी का एक सीनियर कमांडर के तौर पर वापस लौटना भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे चर्चित वापसी में से एक है।