अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि ने कहा अच्छाई में ही सुख शान्ति का मार्ग प्रशस्त होगा

ललितपुर। अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा संसार से निकलो यह मायाजाल है कर्म कहता है कि मैं तुम्हें मोक्ष नहीं जाने दूंगा जवकि आत्मा कहती मैं कर्म को त्योगो आत्मा का कल्याण निश्चित है। मुनि श्री ने कहा जिसने कल तक पाप किया यह मत समझो वह आगे भी करेगा जो आज है वह कल भी रहेगा। पाप जितना पुराना हो उतना जल्दी नाश होने वाला है और ही फूटेगा जबकि अच्छाई जितनी पुरानी हो भण्डार करेगी और सुख शान्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी।धर्मसभा का शुभारम्भ दूरांचलों से आए श्रेष्ठीजनों ने आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख दीपप्रज्जवलित कर मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद ग्रहण किया जिनको दिगम्बर जैन पंचायत समिति द्वारा मार्त्यापण कर सम्मानित किया गाए। ब्रहमचारी अन्नू भैया के संचालन में मुनि श्री की संगीतमय पूजन का पुर्याजन प्रतिभास्थली मण्डल, नंन्दा सुनंदा महिला मंण्डल, सुधा कलश भक्ताम्मर मण्डल, आदर्श महिला मण्डल ने संरक्षक अनीता मोदी के संयोजन में भक्ति पूर्वक कर अर्घ समर्पित किए। श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर के निर्देशक अरूण शास्त्री, आलोक शास्त्री, संजीव शास्त्री ने मुनि श्री से आशीर्वाद ग्रहण किया। इसके पूर्व मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा का श्रावकों ने पुर्ण्यजन किया। मुनि श्री सुधासागर महाराज की आहरचर्या का पुण्यार्जक सुनील समैया नीलेश समैया परिवार को मिला जहाँ श्रावकों ने आहारदान का सौभाग्य अर्जित किया। संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस द्वारा किया गया।इस मौके पर प्रमुख रूप से जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ० अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, कोषाध्यक्ष सीए सौरभ जैन, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, धार्मिक अयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, अनिल जैन अंचल, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, सीए संजीव जैन, अखिलेश गदयाना, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, संजय रसिया, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, जिनेन्द्र जैन डिस्को, संजीव सौरया, सौरभ जैन पीलू राजीव जैन लकी आदि मौजूद रहे। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यकम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में सम्पन्न हुआ जिसमें अनेकों श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज द्वारा पाया इसके उपरान्त गुरूभक्ति में श्रावकों ने सम्मलित होकर मुनि श्री की आरती की और भक्ति में झूमे।

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