बहराइच ( मिहींपुरवा )। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें संवेदनाएं, संस्कार और अपनापन भी शामिल होता है। इसी सोच को साकार कर रहे हैं सुजौली के पीएम श्री संविलियन विद्यालय के शिक्षक, जो विद्यार्थियों को अपने परिवार की तरह स्नेह और मार्गदर्शन दे रहे हैं। विद्यालय में ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है, जहां गुरु-शिष्य का संबंध केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी उदाहरण बन चुका है।विद्यालय में संकुल प्रभारी श्रवण सिंह द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों का आगमन हुआ। जिनका शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने विद्यालय की व्यवस्थाओं, शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थियों के प्रति शिक्षकों के समर्पण की सराहना की।
कार्यक्रम की एक खास पहल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।read more:https://pahaltoday.com/shrimad-bhagwat-katha-started-with-kalash-yatra/ विद्यालय में प्रत्येक महीने एक दिन बच्चों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की जाती है, जिसमें पुलाव, पनीर, रोटी एवं समुचित सलाद सहित पौष्टिक आहार परोसा जाता है। यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखती है, बल्कि उनके भीतर विद्यालय के प्रति अपनापन भी बढ़ाती है। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों ने भी बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद स्थापित किया, उनके अनुभव सुने और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया। बच्चों के साथ एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करने से सामाजिक समरसता और समानता का संदेश भी दिया गया। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार और बेहतर नागरिक बनाना भी है। इसी सोच के साथ वे विद्यार्थियों के साथ परिवार जैसा व्यवहार करते हैं, जिससे बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पीएम श्री संविलियन विद्यालय का यह प्रयास निश्चित रूप से अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।