बाराबंकी। नगर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी स्थित बीएसएनएल एक्सचेंज परिसर में रविवार को उस वक्त फिल्मी अंदाज में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब एक युवक ‘शोले’ फिल्म के वीरू की तरह मोबाइल टावर पर चढ़ गया और नीचे उतरने से इनकार कर दिया। शोले के मशहूर सीन की याद दिलाने वाला यह मामला बाराबंकी में सामने आया, जहां युवक नितिन रावत अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। जैसे ही लोगों ने युवक को टावर पर देखा, इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। यातायात प्रभारी रामरतन यादव ने युवक से मोबाइल पर संपर्क कर उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन युवक अपनी जिद पर अड़ा रहा। वह टावर के ऊपर बैठकर रोता रहा और बार-बार यही कहता रहाकृ “जब तक लड़की नहीं आएगी, मैं नीचे नहीं उतरूंगा।” जानकारी के अनुसार, नितिन रावत देवा थाना क्षेत्र का निवासी है और एक लड़की से प्रेम करता है।read more:https://worldtrustednews.in/panchkalyanak-mahotsav-will-be-held-with-divinity-and-grandeur-in-1008-atishay-kshetra-papaura-ji/ बताया जा रहा है कि जिस लड़की को लेकर वह टावर पर चढ़ा है, वह नाबालिग है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है। परिवार के काफी समझाने के बाद भी युवक नहीं माना और उसने यह कदम उठाकर टावर की ऊंचाई पर जाकर कूदने की धमकी देने लगा। जैसे ही यह खबर स्थानीय लोगों में फैली, वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और युवक को समझाने की कोशिश करने लगे। लेकिन जब युवक नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ, तो पुलिस को सूचना दी गई। घटना की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। स्थिति को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम को भी बुलाई गई और काफी देर तक समझाइश का दौर चला। पुलिस अधिकारियों ने धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा रही, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई थी। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, युवक की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसकी काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि भविष्य में वह इस तरह का कोई जोखिम भरा कदम न उठाए। यह घटना न केवल सामाजिक दबाव और एकतरफा प्रेम की जटिलताओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भावनात्मक असंतुलन किस तरह खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज को संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है, ताकि युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके।