उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने स्टार्टअप सहायता, नियामकीय सुधारों और डिजिटल सिंगल-विंडो मंजूरियों के माध्यम से विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा दिया

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने अनुमति-आधारित नियामकीय व्यवस्था से विश्वास-आधारित नियामकीय ढांचे की ओर निरंतर बदलाव को गति दी है। स्टार्टअप इकोसिस्‍टम, अनुपालन आवश्यकताओं में कमी, सेक्‍टरवार नियमन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और सिंगल विंडो मंजूरी से जुड़े सुधारों ने कारोबार पर नियामकीय बोझ कम किया है। इन सुधारों के परिणामस्वरूप कारोबार शुरू करने, रोजगार सृजन, निवेश और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।डीपीआईआईटी  ने अब तक 2,50,046 स्टार्टअप्स को मान्यता दी है और 770 से अधिक जिलों और 56 उद्योग क्षेत्रों में 25.42 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इनमें से 52 प्रतिशत स्टार्टअप्स महानगरों से बाहर के शहरों में स्थित हैं, जबकि 48 प्रतिशत स्टार्टअप में कम-से-कम एक महिला निदेशक हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में 34,200 स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 36,440 हो गई।स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के अंतर्गत 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 244 इनक्यूबेटरों के माध्यम से 4,194 स्टार्टअप्‍स के लिए 775.67 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें 2,147 महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों के 2,356 स्टार्टअप्स शामिल हैं। स्टार्टअप के लिए निधियों की निधि योजना के अंतर्गत भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 166 वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए 12,623 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। इन कोषों ने 1,475 स्टार्टअप्स में 28,254 करोड़ रुपये का निवेश किया है।स्टार्टअप के लिए ऋण गारंटी योजना के अंतर्गत 1,662.71 करोड़ रुपये के 532 ऋणों को गारंटी प्रदान की गई है। इन ऋणों से लाभान्वित स्टार्टअप्स में 41,637 लोग कार्यरत हैं। प्रति ऋणकर्ता गारंटी कवर की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि 27 चैंपियन सेक्‍टरों के लिए वार्षिक शुल्क घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है।कुल 63 नियामकीय सुधार किए गए हैं। इनमें एंजल टैक्स समाप्त करना, सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध शेयरों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कराधान में समानता लाना तथा बीमा कंपनियों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, सुपरएनुएशन फंड और ग्रेच्युटी फंड को वैकल्पिक निवेश कोषों में निवेश की अनुमति देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, 4,467 स्टार्टअप्स को सेक्‍शन 80-आईएसी के अंतर्गत पात्रता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है।सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर स्टार्टअप के पंजीकरण के लिए पूर्व अनुभव, पूर्व कारोबार और अर्नेस्‍ट मनी डिपोजिट (ईएमडी) संबंधी शर्तों में छूट दी गई है। इसके परिणामस्वरूप ई-मार्केटप्लेस  पर पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या जनवरी 2021 के 7,929 से बढ़कर 43,260 हो गई है। इन स्टार्टअप्स ने सरकारी खरीदारों को 68,105 करोड़ रुपये मूल्य के 6.23 लाख ऑर्डर की आपूर्ति की है। वर्ष 2016 में जहां केवल चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्टार्टअप संबंधी समर्पित नीतियां थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इसके अतिरिक्त, 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 104 नए इनक्यूबेटर स्थापित किए गए हैं, जबकि तेजस पहल 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 132 जिलों में संचालित है।केंद्र सरकार के मंत्रालयों तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 47,957 अनुपालन आवश्यकताओं को कम किया गया है। इनमें से 22,290 का डिजिटलीकरण किया गया, 16,141 को सरल बनाया गया, 5,255 को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और 4,271 को समाप्त किया गया। जन विश्वास अधिनियमों के माध्यम से केंद्रीय कानूनों के 900 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। इनमें वर्ष 2023 में 42 अधिनियमों के 183 प्रावधान और वर्ष 2026 में 79 अधिनियमों के 717 प्रावधान शामिल हैं।राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने कारोबार संबंधी सुधार कार्ययोजना (बीआरएपी) के सात संस्करणों के अंतर्गत 9,700 से अधिक सुधार लागू किए हैं। जिला स्तर की कारोबार सुधार कार्ययोजना के माध्यम से जिला कलेक्ट्रेट, विकास प्राधिकरणों और शहरी स्थानीय निकायों तक 222 सुधारों का विस्तार किया गया है।केंद्रीय श्रम कानूनों के अंतर्गत आने वाले 29 कानूनों को समेकित कर चार श्रम संहिताओं में शामिल किया गया है। छंटनी या प्रतिष्ठान बंद करने के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता संबंधी सीमा 100 से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दी गई है। कारखानों के लिए लागू होने की सीमा भी बढ़ाई गई है। बिजली का उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए यह सीमा 10 से बढ़ाकर 20 श्रमिक और बिजली का उपयोग नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए 20 से बढ़ाकर 40 श्रमिक कर दी गई है। संविदा श्रमिकों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता संबंधी सीमा 20 से बढ़ाकर 50 श्रमिक कर दी गई है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/कानूनी कार्रवाई से पहले अनुपालन के लिए 30 दिन का नोटिस देना भी अनिवार्य किया गया है।पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा जारी लाइसेंस की वैधता अवधि पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दी गई है, जिससे लाइसेंस के नवीनीकरण की आवश्यकता कम हुई है। पीईएसओ  के सभी मॉड्यूल का डिजिटलीकरण कर उन्हें राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है। जिला प्राधिकारियों द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को शुल्क में छूट प्रदान की गई है। औपनिवेशिक काल के बॉयलर अधिनियम, 1923 के स्थान पर बॉयलर अधिनियम, 2025 लागू किया गया है।प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए 17 सेक्‍टरों को ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत लाया गया है। रक्षा क्षेत्र में नए औद्योगिक लाइसेंस के लिए ऑटोमैटिक रूट के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई है। बीमा क्षेत्र में निवेश की सीमा वर्ष 2021 में 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गई थी। वर्ष 2026 में उन बीमा कंपनियों के लिए इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया, जो अपने संपूर्ण प्रीमियम का निवेश भारत में करती हैं। वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बीमा क्षेत्र में लगभग 8.79 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष  विदेशी निवेश हुआ।दूरसंचार, गैर-अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं, नागरिक उड्डयन में ग्राउंड हैंडलिंग, उपग्रह घटक विनिर्माण और प्रसारण वितरण के क्षेत्रों में ऑटोमैटिक रूट के तहत शत-प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।भारत में वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 843  बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। यह इससे पहले के 12 वर्षों में प्राप्त 313 बिलियन डॉलर के निवेश की तुलना में 169 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह 94.53 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली पर अब तक 15,49,850 आवेदन प्राप्त हुए हैं, 5,76,778 कारोबारों का पंजीकरण किया गया है और 8.5 लाख से अधिक मंजूरियां प्रदान की गई हैं। इस प्लेटफॉर्म पर कुल 3,779 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें केंद्र सरकार की 327 और राज्य सरकारों की 3,452 सेवाएं शामिल हैं। सितंबर 2021 में इसके प्रारंभिक शुभारंभ के समय केंद्र सरकार की केवल 142 मंजूरियां और 14 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सेवाएं उपलब्ध थीं। वर्तमान में इस प्रणाली के साथ 34 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश तथा केंद्र सरकार के 32 मंत्रालय एवं विभाग एकीकृत हैं। इनमें से 18 केंद्रीय मंत्रालय राष्ट्रीय सिंगल विंडो का उपयोग कर रहे हैं।अपनी मंजूरियां जानें मॉड्यूल कारोबारियों को शुरुआत में ही यह पहचानने में मदद करता है कि उन्हें केंद्र और राज्य स्तर पर किन-किन मंजूरियों की आवश्यकता होगी। इसके माध्यम से 8,000 से अधिक मंजूरियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 2,825 मंजूरियां—केंद्र सरकार की 592 और राज्य सरकारों की 2,233 मंजूरियां—केवाईए के माध्यम से एकीकृत की गई हैं। बार-बार आंकड़े भरने की प्रक्रिया समाप्त करने के लिए 89 सामान्य डेटा फील्ड को अब 285 मंजूरियों के लिए स्वतः भरने की सुविधा से जोड़ा गया है। उद्यमियों की सुविधा और पहुंच बढ़ाने के लिए यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।राष्ट्रीय सिंगल विंडो का उपयोग मंजूरी की प्रक्रियाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए भी किया जा रहा है। औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन अब कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क और अन्य डेटाबेस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्वतः तैयार हो जाता है। इसके लिए संबंधित विभाग की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। इसी प्रकार, विदेशी पेशेवरों के लिए ई-बी4 उत्पादन वीजा प्रायोजन पत्र राष्ट्रीय सिंगल विंडो और वीजा पोर्टल के बीच एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस के माध्यम से एकीकरण द्वारा तैयार किए जाते हैं। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक नहीं है।राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कारोबारियों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में सिंगल विंडो प्रणाली स्थापित करने और उसे सुदृढ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबारी नियामकीय मंजूरियों और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं के लिए एक ही स्थान पर आवेदन कर सकते हैं। इस व्यवस्था में सिंगल साइन-ऑन, एकल कारोबारी पहचान संख्या, ‘अपनी मंजूरियां जानें’ मॉड्यूल, साझा आवेदन प्रपत्र, ऑनलाइन भुगतान, निरीक्षण प्रबंधन, आवेदकों के लिए मार्गदर्शन, शिकायत निवारण और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच एकीकरण और शुरू से अंत तक डिजिटल प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।इन पहलों का उद्देश्य प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करना, प्रत्यक्ष वास्‍तविक संपर्क की आवश्यकता घटाना, पारदर्शिता बढ़ाना और निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराना है। समग्र रूप से ये सुधार सरल, डिजिटल और कम नियामकीय बोझ वाली व्यवस्था की दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं। इससे कारोबारियों को अधिक सुगमता के साथ व्यवसाय शुरू करने, उसका विस्तार करने और निवेश करने में सहायता मिल रही है।

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