इंदौर में आयोजित पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन चातुर्मास कार्यक्रम में उनके दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने तथा सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता का पुण्य अवसर प्राप्त हुआ।संतों का सान्निध्य जीवन की आपाधापी में कुछ क्षण ठहरकर स्वयं को देखने की दृष्टि देता है। चातुर्मास साधना, संयम और आत्मचिंतन की उस भारतीय संत परंपरा का स्मरण कराता है, जिसमें मनुष्य की सबसे बड़ी यात्रा अपने भीतर की यात्रा मानी गई है। जैन दर्शन के अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह जैसे जीवन-मूल्य हमें सिखाते हैं कि विचारों में विनम्रता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और जीवन में संयम हो।
संतों की वाणी तभी सार्थक होती है, जब वह हमारे आचरण का हिस्सा बने। पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के तप, त्याग और साधना से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को अधिक संवेदनशील, संयमित और सार्थक बनाने का संकल्प लें, यही इस पावन अवसर की सबसे बड़ी सार्थकता है।
पूज्य संतों के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन एवं सभी के सुख, शांति और मंगल की कामना।
जय जिनेंद्र।