केजीएमयू में जोड़ प्रत्यारोपण पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित, देशभर से विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक चिकित्सकों ने लिया हिस्सा

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के हड्डी विभाग, लखनऊ ऑर्थोपेडिक सोसाइटी एवं उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार, 29 अगस्त को केजीएमयू में जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जनों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आधुनिक जोड़ प्रत्यारोपण तकनीकों, नवीनतम इम्प्लांट्स, उन्नत सर्जिकल प्रक्रियाओं तथा मरीजों के बेहतर उपचार परिणामों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए और अपने अनुभव साझा किए।सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण कैडेवरिक वर्कशॉप रहा। इसमें केजीएमयू के प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स, प्रो. डॉ. शैलेंद्र सिंह ने प्रतिभागी ऑर्थोपेडिक सर्जनों को पार्शियल नी रिप्लेसमेंट (Unicompartmental Knee Replacement) की आधुनिक सर्जिकल तकनीक का कैडेवर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/ वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को ऑपरेशन की योजना बनाने, उपयुक्त मरीज का चयन करने, इम्प्लांट की सही स्थिति निर्धारित करने तथा सर्जिकल तकनीक की बारीकियों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।प्रो. डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पार्शियल नी रिप्लेसमेंट चयनित मरीजों के लिए एक प्रभावी और कम इनवेसिव उपचार विकल्प है। इस प्रक्रिया में घुटने के केवल उस हिस्से को बदला जाता है, जो क्षतिग्रस्त हो, जबकि घुटने के स्वस्थ हिस्सों को संरक्षित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की सफलता के लिए उचित मरीज का चयन, सटीक सर्जिकल योजना और उन्नत तकनीक का सही उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और युवा तथा कार्यरत ऑर्थोपेडिक सर्जनों को जोड़ प्रत्यारोपण की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराया। सम्मेलन के माध्यम से चिकित्सकों को उपचार की गुणवत्ता में सुधार, जटिल मामलों के बेहतर प्रबंधन और मरीजों को अधिक प्रभावी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य देश में जोड़ प्रत्यारोपण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाना है।

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