बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थल ‘गौतम कुंड’ को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने तथा इसके संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र और दरभंगा के ब्रह्मपुर पश्चिम निवासी आदर्श कुमार,पिता विपिन ठाकुर ने अपनी जन्मभूमि की इस अनमोल विरासत को बचाने और इसके इतिहास को संरक्षित करने की पुरजोर मांग उठाई है। दरभंगा जिले के ब्रह्मपुर पश्चिम में स्थित गौतम कुंड महर्षि गौतम की साधना, तपस्या और स्नान स्थली के रूप में विख्यात है। स्थानीय जनमानस में इसे ‘गौतमी गंगा’ और ‘पाताल गंगा’ के नाम से भी जाना जाता है। रामायण कालीन प्रसिद्ध ‘अहिल्या स्थान’ के निकट स्थित होने के कारण इस पूरे क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है, जो इसे रामायण सर्किट के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है।
इस पहल के प्रणेता आदर्श कुमार का मानना है कि आधुनिकता की दौड़ में हमारी स्थानीय लोककथाएँ और स्मृतियाँ पीछे छूट रही हैं।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी स्थान की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति या इमारतों से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जन-आस्था, स्मृतियों और लोककथाओं से होती है। गौतम कुंड केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी जड़ों और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। गौतम कुंड के समग्र विकास और संरक्षण के लिए गौतम कुंड से जुड़ी लोककथाओं, इतिहास और परंपराओं का विधिवत दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। इसके साथ ही, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा इस क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए, कुंड के आसपास स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए, तथा इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।लेखक ने सरकार, जिला प्रशासन और पुरातत्वविदों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाएं, ताकि मिथिला की यह महान संस्कृति और प्राचीन इतिहास सुरक्षित रह सके।