बाराबंकी। तहसील फतेहपुर में 19वीं सफर की अलविदाई मजलिस का आयोजन श्रद्धा और अकीदत के साथ किया गया। इस मजलिस को शिया धर्मगुरु और शाही आसफी मस्जिद लखनऊ के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने संबोधित किया। उन्होंने कुरआन और अहलेबैत की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि अल्लाह तआला ने उम्मत के लिए दो सबसे बड़ी नेमतें छोड़ी हैं-एक कुरआन और दूसरी अहलेबैत। ये दोनों इंसान को सीधी राह दिखाने का सबसे बड़ा जरिया हैं। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया था कि वह अपनी उम्मत के बीच दो भारी चीजें छोड़कर जा रहे हैं-कुरआन और अहलेबैत। जो इन दोनों का दामन थामे रहेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुरआन हिदायत की किताब है, जबकि अहलेबैत उसकी सही तफसीर और अमली नमूना हैं। मौलाना ने जोर दिया कि जिस घर में कुरआन की तिलावत होती है और अहलेबैत की मोहब्बत बसती है, वहां हिदायत हमेशा कायम रहती है। मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि अहलेबैत ने अपने चाहने वालों को कभी शर्मिंदा नहीं किया।read more:https://pahaltoday.com/mayawati-carries-out-a-major-organizational-reshuffle-relatives-by-marriage-ashok-and-randhir-expelled-from-the-bsp/ जिसने भी उनकी सीरत और शिक्षाओं को अपनाया, उसे दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी मिली। उन्होंने यह भी कहा कि अहलेबैत का मुकाबला किसी से नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनकी परवरिश स्वयं पैगंबर-ए-इस्लाम ने की थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में कुरआन को जगह दें और नई पीढ़ी को अहलेबैत की सीरत और किरदार से परिचित कराएं। चेहल्लुम की अहमियत पर बोलते हुए मौलाना ने कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि जुल्म चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, हक और इंसाफ को कभी मिटाया नहीं जा सकता। इमाम हुसैन ने अपनी महान कुर्बानी देकर इस्लाम की असली रूह को जिंदा रखा। उन्होंने कहा कि आज हर इंसान का फर्ज है कि वह मजलूम का साथ दे, नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाए और समाज में अमन, भाईचारा और इंसाफ को बढ़ावा दे। यही असली अज़ादारी का पैगाम है। मजलिस के अंत में मौलाना ने हजरत जैनब के मसाइब बयान किए, जिसे सुनकर मौजूद अज़ादार गमगीन हो गए और उनकी आंखें नम हो उठीं। इस अवसर पर हसन रज़ी और सुल्तान ने नौहाख्वानी पेश की, जबकि स्वर्गीय जमाल मेहदी के पुत्र इब्राहीम ने सवारी पढ़ी। कार्यक्रम के अंत में इमामबाड़ा ट्रस्ट के मुतवल्ली, समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद हसन इब्राहीम काज़मी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। अंत में मुल्क, कौम और पूरी इंसानियत की सलामती, अमन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ कराई गई।