बलिया में दिव्यांगजनों की समस्याएं सुनने पहुंची मोबाइल कोर्ट, राज्य आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश

बलिया। उत्तर प्रदेश के राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा की अध्यक्षता में मंगलवार को विकास भवन सभागार में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान राज्य आयुक्त ने दिव्यांगजनों की समस्याएं सुनीं, उनके सुझाव लिए और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। राज्य आयुक्त ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत मिलने वाले अधिकारों एवं सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के दिव्यांग बच्चों को समेकित वातावरण में निःशुल्क शिक्षा, शैक्षणिक संस्थानों एवं रोजगार में आरक्षण, गरीबी उन्मूलन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आरक्षण सहित विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव रोकने और दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की मंशा के अनुरूप मोबाइल कोर्ट का उद्देश्य दिव्यांगजनों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है।read more:https://khabarentertainment.in/the-drug-free-youth-developed-india-pledge-campaign-will-run-across-the-state-starting-august-2/इस क्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को निर्देश दिए गए कि लंबित दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के निस्तारण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं तथा जिन पात्र व्यक्तियों का पंजीकरण हो चुका है, उन्हें एक माह के भीतर प्रमाण पत्र जारी किया जाए। साथ ही केवल पात्र व्यक्तियों को ही प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए। राज्य आयुक्त ने जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहकर दिव्यांगजनों की समस्याएं सुनने और उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने तहसील दिवस पर भी दिव्यांगजनों की शिकायतों को प्राथमिकता से सुनने के निर्देश दिए।मोबाइल कोर्ट के दौरान कुल 198 लोगों का पंजीकरण किया गया, जबकि पांच दिव्यांगजनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और छ: मामलों को अन्य जनपदों के लिए रेफर किया गया। आवास, राशन कार्ड एवं शौचालय जैसी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। राज्य आयुक्त ने सीएमओ को निर्देशित किया कि ईएनटी विशेषज्ञ चिकित्सक की व्यवस्था अन्य जनपद से कराई जाए तथा ‘बेरा मशीन’ की खरीद भी शीघ्र की जाए। उन्होंने पांच वर्ष से अधिक समय से मेडिकल बोर्ड में तैनात डॉक्टरों को हटाने तथा अस्थायी (टेम्पररी) मेडिकल सर्टिफिकेट जारी नहीं करने के निर्देश भी दिए। कार्यक्रम के दौरान कई दिव्यांगजनों ने ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर नहीं मिलने की शिकायत की। इस पर राज्य आयुक्त ने जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को पात्र लाभार्थियों को शीघ्र ट्राइसाइकिल एवं व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी पारस नाथ यादव ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि पात्र दिव्यांगजनों को प्रत्येक तीन माह पर दिव्यांग पेंशन का लाभ दिया जाता है। इसके लिए 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता तथा मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य है।मोबाइल कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजनों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में सीडीओ आलोक कुमार, सीएमओ अभय कुमार राय, आरटीओ अरुण कुमार राय एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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