ललितपुर। शुक्रवार को अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश विधान परिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सभापति डॉ लालजी प्रसाद निर्मल ने पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस में जिले में दैवीय आपदा प्रबंधन की योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। सभापति ने समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि आपदा के दौरान प्रभावित व्यक्ति के साथ खडे हों तथा आपदा प्रबंधन द्वारा ग्राम प्रधानों के साथ समय-समय पर प्रशिक्षण व बैठक करायी जाए, जिससे ग्राम समुदाय में दैवीय आपदा की जानकारी रहे और आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न आपदाओं (सर्पदंश, डूबने, आकाशीय विद्युत) आदि पर जागरुकता हेतु कार्ययोजना तैयार कर जागरुकता अभियान चलाया जाए, जिससे आपदा से होने वाली क्षति को कम किया जा सके। सभापति के आगमन पर जिलाधिकारी श्री सत्य प्रकाश ने बुके भेंट कर उनका स्वागत किया। तदोपरान्त समीक्षा शुरू की गई, उन्होंने दैवीय आपदा से संबंधित विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए जनपद में कौन-कौन सी आपदाएं प्रभावित करती हैं, आपदाओं के प्रभाव को कम करने हेतु की जाने वाली कार्यवाही, विभिन्न आपदाओं पर दी जाने वाली राहत राशि, आपदा से निपटने के तरीकों पर संवाद, दामिनी ऐप, सचेत ऐप आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आकाशीय विद्युत, डूबने, सर्पदंश, सूखा, अतिवृष्टि आदि पर विस्तृत जानकारी लेते हुए आम जन-मानस के बीच जागरुकता अभियान चलाए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील ग्रामों में संभावित आपदा के संबंध में जागरुकता कार्यशाला/राहत चौपाल लगाकर आम लोगों को जागरुक किया जाए।सभापति ने आपदा के जोखिम न्यूनीकरण व पुनर्वास एवं आपदा कंट्रोल रूम के बारे में भी जानकारी ली। इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा पांच वर्षों में किए कार्यों/राहत राशि वितरण व आपदा प्रबंधन व क्षतिपूर्ति योजनाओं के बारे में सभापति महोदय को विस्तार से बताया गया। उन्होंने कहा कि घटना, दुर्घटना/आपदा के समय त्वरित कार्यवाही की जाती है तथा समय-समय पर आपदा कार्यशाला/मासिक बैठक/ग्राम चौपाल/राहत चौपाल कर आम जनमानस व विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों को ऋतु पूर्व आपदा के संबंध प्रशिक्षण/जानकारी दी जाती है। जनपद में सोसल मीडिया, व्हाटसऐप ग्रुप, ट्वीटर एवं फेसबुक के माध्यम से मौसम विभाग द्वारा दी जाने वाली जानकारियों को आम जनमानस तक प्रसारित किया जाता है। स्कूल, डिग्री कॉलेज, हॉस्पिटल, मॉल आदि में मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा के समय क्या करें, क्या न करें संबंधित जानकारी आम-जनमानस को दी जाती है।अपर जिलाधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026-27 में आकाशीय बिजली से हुई 7 जनहानियों के सापेक्ष 28 लाख, 2 पशु हानि में 75 हजार व 1 घायल व्यक्ति को 54 सौ की क्षतिपूर्ति दी गई है, इसी प्रकार पानी में डूबने से हुई 13 जनहानियों में 52 लाख, आंधी तूफान से हुई 1 जनहानि में 4 लाख, 1 पशुहानि में 37 हजार 500, 2 घायलों को 10 हजार 800 एवं 3 मकानों की क्षति हेतु 12 हजार की क्षतिपूर्ति दी गई है। सर्पदंश से हुई 1 जनहानि में 7 जनहानियों में 28 लाख, 4 पशुहानि में 1 लाख 50 हजार की क्षतिपूर्ति तथा अतिवृष्टि के कारण 2 मकानों की क्षति के लिए 8 हजार व अग्निकाण्ड के कारण 4 मकानों की क्षति के लिए 28 हजार की क्षतिपूर्ति दी गई है। read more:https://khabarentertainment.in/payagpur-gets-a-new-sdm-pooja-chaudhary-takes-charge-focus-to-remain-on-development-works-and-public-grievance-redressal/इस प्रकार कुल 28 जनहानियों में 11200000, 7 पशुहानियों में 262500, 3 घायलों को 16200 व 4 क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 48000 की क्षतिपूर्ति वितरित की गई है।
आपदा प्रबंधन की समीक्षा उपरान्त सभापति द्वारा जनपद/ग्राम स्तर पर प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की गयी।
समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार, जिला विकास अधिकारी अतिरंजन सिंह, आपदा विशेषज्ञ श्रीमती आरती सिंह उपस्थित रहे।