सीएए के विरोध में रेलवे को क्षति पहुंचाने वालों से होगी भरपाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ साल 2019 में हुए हिंसक प्रदर्शनों का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है।इस दौरान रेलवे संपत्तियों को पहुंचाए गए भारी नुकसान के मामलों में अब फिर से कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य भर में दर्ज सभी पुराने मामलों की दोबारा समीक्षा करने और दोषियों से आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक एसएन गुप्ता को 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों की सघन समीक्षा करने का आदेश दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस बड़े फैसले के बाद उस दौर की सभी लंबित और बंद हो चुकी फाइलों को फिर से खोला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उस समय कानून में पर्याप्त प्रावधान होने के बावजूद नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाया गया था। लेकिन अब सरकार का रुख बेहद सख्त है और वह चाहती है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले चिन्हित लोगों से सीधे तौर पर आर्थिक क्षतिपूर्ति वसूली जाए। इस मामले में दो प्रमुख कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करने की तैयारी है।read more:https://khabarentertainment.in/case-filed-against-youth-for-making-obscene-comments-to-minor-student/पहला, वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (संशोधन) अधिनियम, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्र के लोगों से सामूहिक मुआवजा वसूला जा सकता है। दूसरा, प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, जिसके तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषियों को पांच साल तक की कठोर सजा और आर्थिक दंड दोनों भुगतना पड़ सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पुलिस और रेलवे प्रशासन अब संयुक्त रूप से उन सभी मामलों की फाइलें दोबारा खंगालेगा, जिनमें रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को नुकसान पहुंचाया गया था। जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और उनसे वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे आरोपियों पर कानूनी और आर्थिक दबाव बढ़ना तय है। रेलवे को करीब 93 करोड़ की क्षति दिसंबर 2019 में हुए इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी। उपद्रवियों ने रेलवे स्टेशनों, पटरियों और ट्रेनों को सीधे तौर पर निशाना बनाया था, जिससे रेलवे को करीब 93 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ था। इस दौरान कई गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। 13 दिसंबर 2019 को उलुबेरिया के पास फलकनुमा एक्सप्रेस पर पथराव की घटना हुई थी। इसके बाद मुर्शिदाबाद के बेलडांगा रेलवे स्टेशन को 15 और 16 दिसंबर को दो बार आग के हवाले कर दिया गया था। वहीं, कृष्णापुर स्टेशन पर उपद्रवियों ने पांच ट्रेनों को फूंक दिया था। इस हिंसक माहौल के बीच कानून-व्यवस्था संभालने उतरी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की टीम पर भी जानलेवा हमला किया गया था।

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