वेदांता ग्रुप के कई ठिकानों पर ईडी ने की ताबड़तोड़ छापेमारी

नई दिल्ली। दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता ग्रुप के कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप मच गया है, हालांकि अभी तक कंपनी की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या जवाब सामने नहीं आया है। दरअसल, ईडी फेमा के तहत एक्शन तब लेता है जब किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा के लेन-देन में नियमों के उल्लंघन का संदेह होता है। इसमें मुख्य रूप से अवैध रूप से विदेशों में धन हस्तांतरण (हवाला), विदेश में अवैध संपत्ति अर्जित करना या विदेशी निवेश से जुड़े सरकारी नियमों का पालन न करना शामिल होता है। फेमा अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ही भारत में विदेशी मुद्रा के लेन-देन को विनियमित और व्यवस्थित करना है।read more:https://pahaltoday.com/meritorious-students-who-were-in-the-top-ten-list-of-the-state-and-district-were-honored/चूंकि वेदांता ग्रुप का बिजनेस दुनिया के कई अन्य देशों में भी फैला है, इसलिए विदेशी लेन-देन से जुड़े नियमों को लेकर यह कार्रवाई की जा रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब वेदांता ग्रुप केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आया है। इससे पहले साल 2004 में भी यह समूह विदेशी मुद्रा मामलों में नियामक जांच के दायरे में आ चुका है। उस समय जांच एजेंसी ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके तीन प्रमोटर निदेशकों को फेरा और फेमा के नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया था, जिसके बाद कंपनी और निदेशकों पर भारी जुर्माना लगाया गया था। वेदांता भारत की एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो मुख्य रूप से एल्युमिनियम उत्पादन के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, भारत की कुल जिंक जरूरत का लगभग 81 फीसदी उत्पादन अकेले इसी ग्रुप द्वारा किया जाता है। कंपनी केयर्न इंडिया की मदद से कच्चे तेल के उत्पादन में भी सक्रिय है। समूह ने भारत में अगले कुछ सालों में करीब 2 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश करने की योजना बनाई है, ऐसे में ईडी की यह कार्रवाई कंपनी के भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।

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