ईरान ने दोस्ती निभाते हुए भारत को दिया सुरक्षित रास्ते का भरोसा

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व (मिडिल-ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों और तनावपूर्ण कूटनीतिक माहौल के बीच ईरान ने भारत के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को एक नई ऊंचाई दी है।ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’में भारतीय जहाजों को विशेष रियायत और सुरक्षा दी जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और वैश्विक तेल आपूर्ति के इस मुख्य मार्ग पर ईरान अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ईरानी उप विदेश मंत्री ने भारत को ‘दोस्त देश’ संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तेहरान और नई दिल्ली इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलना चाहिए। गरीबाबादी के मुताबिक, अब तक 11 भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की विशेष अनुमति दी जा चुकी है और 13 अन्य जहाजों की मंजूरी पर काम चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सुविधा किसी अन्य देश को नहीं दी जा रही है, जो भारत के प्रति ईरान के विशेष झुकाव को दर्शाता है। ईरानी मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम बनाए गए हैं, जिसमें कुछ शुल्क (टोल) लगाने की योजना भी शामिल है। हालांकि, भारत के लिए इसमें नरमी बरतने के संकेत दिए गए हैं। अमेरिका के साथ जारी गतिरोध पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि अमेरिका चाहता है कि होर्मुज को पूरी तरह खोला जाए, तो उसे ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने होंगे और जब्त संपत्तियां वापस करनी होंगी। उन्होंने परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत के बारे में बताया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका केवल अपनी शर्तें थोपना चाहता है। भारत की यात्रा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से भी मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस संवाद की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रमों और सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक बातचीत हुई है। ईरान का यह कदम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक साख को भी प्रमाणित करता है।

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