प्यासे पशु-पक्षी, अपूर्ण जलस्रोत और खामोश प्रशासन—जनता मांगे जवाब

पहल टुडे, शशिकांत तिवारी –अमेठी। जनपद के भेंटुआ विकासखंड के हारीपुर, घटकौर , खंडहर, गैरिकपुर सहित दर्जनों गांवों और भादर विकासखंड के बैद्धिकपुर, नगरडीह, गुड़री समेत कई गांवों में जलस्रोत बदहाली की हद पार कर चुके हैं। कहीं तालाब सूख चुके हैं तो कहीं झाड़ियों ने ऐसा कब्जा कर लिया है कि वहां गंदगी का अंबार लग गया है।तालाबों की यह स्थिति न सिर्फ जल संरक्षण योजनाओं की पोल खोल रही है, बल्कि ग्रामीणों के लिए भी गंभीर समस्या बनती जा रही है। झाड़ियों और गंदगी के कारण जलस्रोत अनुपयोगी हो चुके हैं, जिससे पशु-पक्षियों के सामने पानी का संकट गहराता जा रहा है।इधर संग्रामपुर क्षेत्र में सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना भी अधूरी पड़ी है। धोएं, बदलापुर, सरैया कनू, बड़गांव, मिसरौली, मड़ौली, नेवादा, मिसरौली बड़गांव समेत कई गांवों में सरोवर निर्माण अधर में लटका हुआ है। जो बने भी हैं, वे झाड़ियों और गंदगी से पटे पड़े हैं।जनता के सवाल—जवाब किसके पास?जब बजट आया तो काम पूरा क्यों नहीं हुआ?
झाड़ियों और गंदगी की सफाई की जिम्मेदारी किसकी है?क्या अमृत सरोवर सिर्फ कागजों में ही पूरे हो गए?आखिर कब तक पशु-पक्षी और ग्रामीण पानी के लिए भटकते रहेंगे?ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते तालाबों की सफाई, गहरीकरण और अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा कराया जाता, तो आज यह हालात पैदा नहीं होते।गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ रही है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती हालात को और गंभीर बना रही है।अब सवाल सीधा है—क्या जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे, या फिर यह जल संकट यूं ही बढ़ता रहेगा?

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