सत्ता की ग़ुलामी करने में मदहोश देश का गोदी मीडिया तमाम अपमानों,ज़लालत,विरोध व आलोचनाओं के बावजूद अपनी प्रस्तुति,सामग्री व शब्दों के चयन के स्तर को दिन प्रतिदिन गिराता जा रहा है। हद तो यह है अपनी टी आर पी बढ़ाने के चक्कर में पाकिस्तान व अन्य देशों के अतिथियों को अपने साथ लाईव जोड़कर उनसे विवदित व बेतुके सवाल पूछकर उन्हें ‘बदकलामी ‘ करने के लिये जानबूझकर उकसाया जाता है। ताकि वे तीखा जवाब दें जिससे बहस में गर्मी पैदा हो और बहस में असंसदीय व अभद्र शब्दों का इस्तेमाल हो। और इसी शोर शराबे की आड़ में उनकी टी आर पी भी बढ़े उनका एजेंडा भी पूरा हो और उनके सरपरस्त ‘आक़ा’ भी खुश हो सकें। देश को कलंकित करने वाले ऐसे अनेक टी वी स्टूडियो में डिबेट के दौरान गाली गलौज,धक्का मुक्की मार पीट सब कुछ तो होता रहता है ? अफ़सोस यह कि यह सब पूर्वनियोजित होता है और जानबूझकर करवाया जाता है।सरकारी टी वी चैनल डीडी न्यूज़ के शो ‘दो टूक’ के एंकर अशोक श्रीवास्तव द्वारा अपने इसी शो में पिछले दिनों की गयी एक अत्यंत घटिया टिप्पणी को सुनकर भला कौन कह सकता कि यह भाषा किसी पत्रकार या टीवी एंकर की भाषा हो सकती है। एक लाइव डिबेट के दौरान अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि “राहुल गांधी सावरकर के चप्पल की धूल के एक कण के हज़ारवें हिस्से के बराबर भी नहीं हैं। राहुल गांधी सावरकर के जूते की नोक के बराबर भी नहीं हैं, और उस नोक पर लगी धूल के कण के भी हज़ारवें भाग के बराबर नहीं हैं।” एंकर अशोक श्रीवास्तव द्वारा यह टिप्पणी सावरकर को श्रद्धांजलि देते समय राहुल गांधी से उनकी तुलना करने के बहाने से की गई थी। इस ओछी व घटिया टिप्पणी के बाद ख़ासकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया। कई विपक्षी नेताओं ने भी ऐसी घटिया टिप्पणी को अपमानजनक व असभ्य बताया। इसके बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली में दूरदर्शन मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “ये पत्रकारिता नहीं, सत्ता की दलाली है” जैसे नारे लगाये। गोदी मीडिया का पुतला फूंका गया। इसके बाद यह सवाल भी खड़ा हुआ कि निजी टी वी चैनल तो भय लालच व्यवसायिकता अथवा वैचारिक कारणों से तो सत्ता की गोद में जाकर बैठ ही चुके हैं परन्तु आख़िर देश के कर दाताओं के पैसों से चलने वाला सरकारी चैनल भी क्या अपनी निष्पक्षता खो चुका है ? क्या DD News पर भी करोड़ों रूपये लेने वाले पत्रकार व टाई सूट में सजे धजे टी वी ऐंकर भी अब आई टी सेल या ट्रोलर्स की भाषा बोलने के लिये मजबूर हो चुके हैं ?read more:https://khabarentertainment.in/raid-against-illegal-liquor-two-distilleries-destroyed-25-litres-of-raw-liquor-and-150-kg-of-raw-material-recovered/ इसी तरह एक निजी टीवी चैनल की एक एंकर हैं जिन्होंने पिछले दिनों इफ़्तार पार्टी आयोजित कर कई राजनेताओं को दावत दी थी। उनकी यह दावत और आमंत्रित लोगों को देखकर यह समझने में देर नहीं लगी कि उनका राजनैतिक रुझान भी है और वह पत्रकारिता के बाद संभवतः राजनीति में ही अपना कैरियर बना सकती हैं। दरअसल गोदी पत्रकारों को यह मालूम है कि ‘गोदी ‘ से उतरने के बाद वे इस लायक़ ही नहीं रहेंगे कि अपना कोई प्लेटफ़ॉर्म खड़ाकर उसपर अपने ‘जौहर’ दिखा सकें। क्योंकि हर पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन,रवीश कुमार,अजीत अंजुम,अभिसार शर्मा,अशोक पाण्डेय,पुण्य प्रसून वाजपेई, प्रज्ञा मिश्रा,आरिफ़ा ख़ानम या आशुतोष जैसे पत्रकारों के नक़्शे क़दम पर नहीं चल सकता। दरअसल ऐसी पत्रकारिता के लिये अध्ययन,साहस,ज्ञान,पत्रकारिता का दायित्वबोध आदि सब कुछ चाहिये जो चाटुकारिता या सत्ता की दलाली के लिये ज़रूरी नहीं। बहरहाल गोदी चैनल की यही मोहतरमा अपने चैनल पर एक पाकिस्तानी मेहमान को बार बार बुलाती हैं। यह जब उससे कोई तीखा सवाल जानबूझकर करती हैं तो वह शख़्स इनसे भी तीखा जवाब देता है। मैंने उसे अपशब्द बोलते,गलियां निकालते भी सुना यहाँ तक कि उसकी कई टिप्पणियों से हमारे देश की तौहीन भी हुई। परन्तु यह आज भी उसे जानबूझकर बार बार बुलाती हैं। अब तो उस पाकिस्तानी व्यक्ति की लोकप्रियता गोदी चैनल्स में इतनी बढ़ गयी है कि वह व्यक्ति दूसरे चैनल्स पर भी नज़र आने लगा है। वह ख़ुद भी कह चुका है कि तुम हिंदुस्तानी चैनल वाले मुझे बुलाते ही इसलिये हो ताकि तुम्हारी टी आर पी बढ़े । सनसनी फैलाने,पक्षपात करने,सत्ता का गुणगान करने,भ्रामक रिपोर्टिंग करने,बहस में अपना एजेंडा थोपने,साम्प्रदायिकता फैलाने सत्ता के बजाय विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने,मंहगाई,बेरोज़गारी,शिक्षा,