डॉ अभिषेक त्यागी
दीवार गिरने की आवाज ने रमजान की खरीदारी की गूंज को दफन कर दिया है। पिछले 72 घंटों में मेरठ के शास्त्री नगर में बुलडोजर और सीलिंग अभियान ने 44 दुकानों को मलबे में बदल दिया और सैकड़ों को सील कर दिया। करीब 40 हज़ार परिवारों की रोज़ी रोटी अटक गई है।यह कार्रवाई मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ‘सेटबैक एन्क्रोचमेंट’ (अवैध निर्माण) के मामले में की। कुल 859 प्रॉपर्टी चिन्हित की गई हैं, जिनमें स्कूल और नर्सिंग होम भी शामिल हैं। लेकिन जिन लोगों ने इन दुकानों में जान लगा दी थी, उनके लिए यह सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि तबाही है।’23 साल की मेहनत एक घंटे में बर्बाद’“मैं 28 साल की उम्र में इस कपड़े की दुकान पर आया था। आज 51 का हूँ। अब कहाँ जाऊँ?” – यह दर्द है रमेश चंद का, जो बंद शटर के सामने खड़े-खड़े सहम जाते हैं। उनके हाथ काँपते हैं जब वे बताते हैं कि जेसीबी की एक चपेट ने उनकी जिंदगी की कमाई कैसे मिट्टी में मिला दी।पास में ही कुछ महिलाएं अपने शिशुओं को गोद में लिए धरने पर बैठी हैं। एक सब्जी विक्रेता, जिसकी रेहड़ी उजड़ गई, फफक पड़ी – “हमने घर बेचने के बोर्ड लगा दिए हैं। यह नहीं दिखाने के लिए कि हम बेचना चाहते हैं, बल्कि यह बताने के लिए कि हमें सड़क पर फेंका जा रहा है।”कई दुकानदारों ने सील शटर पर हाथ से लिखे नोट चिपका दिए हैं – “हम जा रहे हैं। मेरठ में अब हमारी कोई जगह नहीं।”वोट दिया, लेकिन सिर्फ चुप्पी मिली लेकिन सबसे गहरा ज़ख्म आर्थिक नहीं, राजनीतिक है।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-against-illegal-hospitals-in-mihipurwa-city-area/ इनमें से अधिकतर दुकानदारों ने पिछले विधानसभा और नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट दिया था। उन्हें भरोसा था कि पार्टी छोटे कारोबारियों की रक्षा करेगी।“हम वही लोग हैं जिन्होंने भाजपा के झंडे लहराए थे। आज हमारे स्थानीय विधायकों के फोन नहीं उठते। पार्टी पूरी तरह चुप है,” – यह बात है संजीव मित्तल की, जिनकी हार्डवेयर की दुकान उजड़ गई, हालाँकि उनके पास पुराने प्रशासन का ‘नो ऑब्जेक्शन’ पत्र था।जहाँ विपक्षी नेता मौके पर पहुँच चुके हैं, वहीं भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने अब तक दुकानदारों की व्यथा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। एक MDA अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाध्यकारी है। इसमें कोई राजनीतिक विवेकाधिकार नहीं है।”दिल्ली कूच, और एक फरियाद मेरठ व्यापार मंडल ने अब दिल्ली पैदल मार्च की घोषणा की है। उनकी माँग है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे।मंडल के अध्यक्ष कहते हैं, “हमने विकास के लिए वोट दिया था, विनाश के लिए नहीं। अगर हमारे ही नेता हमारी नहीं सुनेंगे, तो कौन सुनेगा?”शास्त्री नगर में जैसे ही शाम ढलती है, कुछ दुकानदार मलबे के पास मोमबत्तियाँ जलाते हैं – विरोध में नहीं, बल्कि पड़ोसी जिले के एक भाजपा कार्यकर्ता की याद में, जो इसी तरह के अभियान में अपना फलों का ठेला खोकर कथित तौर पर पिछले महीने आत्महत्या कर बैठा था।बुलडोजर तो रुक गए, लेकिन व्यापारियों के मुताबिक, सत्ता की चुप्पी कहीं ज़्यादा दर्दनाक है।लेखक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक हैं