आधी आबादी का अधिकार, विकसित भारत का आधार — नारी शक्ति वंदन से सशक्त लोकतंत्र की ओर ऐतिहासिक कदम

गाजियाबाद।“जब नारी सशक्त होती है, तो समाज सशक्त होता है… और जब समाज सशक्त होता है, तो राष्ट्र अजेय बनता है।”इसी विचार को साकार करते हुए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम–2023 भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्थापित हो रहा है।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक निर्णय केवल एक कानून नहीं, बल्कि करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान, अधिकार और सहभागिता को सुनिश्चित करने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का यह कदम उन्हें “भागीदार” से “निर्णयकर्ता” बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया है। अब यह अधिनियम उस दिशा को और सुदृढ़ करेगा, जिससे नीतियां अधिक संवेदनशील, समावेशी और जन-केंद्रित बनेंगी।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष एवं गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल जी ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण का नया युग प्रारंभ करेगा और आने वाले समय में नीति निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगा।”कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में रिचा सूद, चेयरपर्सन ट्रिडेंट ट्रस्ट, इंटरनेशनल अवॉर्डी, गोल्ड मेडलिस्ट एथलीट, ब्रांड एंबेसडर एवं भारत गौरव सम्मान से सम्मानित, ट्रेडेक्स स्पीकर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “जब महिलाओं को अवसर मिलता है, तो वे न केवल स्वयं आगे बढ़ती हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा देती हैं।”read more:https://khabarentertainment.in/cpim-busy-preparing-for-delhi-rally-politburo-member-reaches-sonbhadra/ इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय नेटबॉल खिलाड़ी रत्ना त्यागी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, और यह अधिनियम उन्हें नई ऊर्जा और मंच प्रदान करेगा।”पिछले एक दशक में भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों ने यह सिद्ध किया है कि जब महिलाओं को अवसर मिलता है, तो परिणाम पूरे समाज को आगे बढ़ाते हैं—32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुलना आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है।मुद्रा योजना में लगभग 68% लाभार्थी महिलाएं हैं।10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी संख्या में घरों का स्वामित्व महिलाओं के नाम है।STEM क्षेत्रों में 43% महिला भागीदारी भारत की नई दिशा को दर्शाती है।सरकारी योजनाओं का प्रभाव—उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे निर्णयों ने महिलाओं के जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया है। मातृ मृत्यु दर में निरंतर कमी इन प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।पंचायती राज में लगभग 46% महिला प्रतिनिधित्व (14.5 लाख महिलाएं) यह दर्शाता है कि महिलाओं को अवसर मिलने पर वे प्रभावी नेतृत्व प्रदान करती हैं। यही मॉडल अब संसद और विधानसभाओं में लागू होकर लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।यह अधिनियम केवल आरक्षण नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल रिफॉर्म है, जो महिलाओं को “लाभार्थी” से “नीति निर्माता” बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।सदैव इस विचार के साथ कार्य करती रही है कि “नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।”“विकसित भारत 2047” का सपना महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है।“नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है।”

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