स्नेहा सिंह
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में युद्धविराम की घोषणा की गई है। यह दुनिया के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं। खासकर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कमी को देखते हुए इससे राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारों के अनुसार, ईरान द्वारा रखी गई शर्तों के आधार पर होर्मुज की खाड़ी को खोला जाएगा। इसके बाद भारत सहित दुनिया भर के जहाजों की आवाजाही आसान हो सकती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि होर्मुज की खाड़ी के आसपास ईरान ने समुद्र में नेवल और मरीन माइंस बिछा रखी हैं। केवल कुछ सीमित क्षेत्रों को खाली रखा गया है, जहां से उसके अपने जहाज गुजर रहे हैं, बाकी जगहों पर प्रतिबंध है।उल्लेखनीय है कि 15 दिनों के युद्धविराम के दौरान इस मार्ग के खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में बड़े पैमाने पर नेवल और मरीन माइंस बिछाई थीं।इन माइंस की संख्या इतनी अधिक है कि यदि कोई जहाज उनसे टकरा जाए तो भारी नुकसान हो सकता है। ईरान ने कुछ सीमित रास्तों के लिए कोड और शर्तें तय की हैं। अब जब युद्धविराम हुआ है और व्यापार फिर से शुरू होने की संभावना है, तो इस बड़े खतरे को दूर करना जरूरी होगा। इसके लिए नेवल माइंस को हटाने की प्रक्रिया पर काम करना होगा।read more:https://khabarentertainment.in/accused-of-making-them-work-beyond-the-stipulated-time-workers-staged-a-protest/ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इतनी बड़ी संख्या में माइंस बिछाई हैं कि इससे वैश्विक व्यापार को गंभीर नुकसान हो सकता है। इन्हें हटाने में काफी समय और भारी खर्च आएगा।सी माइंस या नेवल माइंस पानी के अंदर छिपे विस्फोटक होते हैं, जो जहाज के संपर्क में आते ही फट जाते हैं। ये महीनों तक निष्क्रिय पड़े रह सकते हैं और अचानक सक्रिय होकर जहाजों और पनडुब्बियों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध में नेवल माइंस का व्यापक और रणनीतिक उपयोग हुआ था। ऑपरेशन स्टार्वेशन इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें अमेरिका ने प्रशांत महासागर में 12,000 माइंस बिछाईं और जापान के 650 से अधिक जहाज नष्ट कर दिए, जिससे उसकी नौसेना और व्यापार को भारी क्षति हुई।विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न देश माइस बिछाने के लिए माइनलेयर जहाजों का उपयोग करते हैं, जिन्हें खास तौर पर इसी उद्देश्य से डिजाइन किया जाता है। ये जहाज रेलिंग के माध्यम से माइंस समुद्र में छोड़ते हैं। इसके अलावा, सामान्य स्पीडबोट या व्यापारिक जहाजों का उपयोग भी किया जाता है। पनडुब्बियों के जरिए गुप्त रूप से माइंस बिछाई जाती हैं, जहां वे टारपीडो ट्यूब के माध्यम से दुश्मन के समुद्री क्षेत्र में माइंस छोड़ती हैं। कई बार विमान और हेलिकाप्टर से भी पैराशूट के जरिए माइंस समुद्र में गिराई जाती हैं। उथले पानी में गोताखोरों के माध्यम से भी माइंस लगाई जाती हैं।read more:https://khabarentertainment.in/the-wedding-party-and-the-grooms-side-clashed-when-the-dj-stopped-working/ नेवल या मरीन माइंस सामान्यतः तीन प्रकार की होती हैं। पहली होती हैं कांटैक्ट माइंस, जो जहाज के टकराने पर फटती हैं। दूसरी मैग्नेटिक माइंस होती हैं, जो जहाज के लोहे से आकर्षित होकर नीचे चिपक जाती हैं और विस्फोट करती हैं। तीसरी अकास्टिक माइंस होती हैं, जो जहाज के इंजन या प्रोपेलर की आवाज से सक्रिय हो जाती हैं और पास आने पर फट जाती हैं।इन सभी माइंस को हटाना बेहद कठिन कार्य है। होर्मुज में माइंस की खोज और उन्हें नष्ट करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पानी का तेज बहाव, असमान गहराई, समुद्री चट्टानें, जहाजों के मलबे और वनस्पति, इन सबके बीच माइंस को ढूंढना मुश्किल होता है।विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज की खाड़ी से माइंस को पूरी तरह हटाने में कम से कम 6 महीने लग सकते हैं और यदि स्थिति अधिक जटिल हुई तो एक साल भी लग सकता है।माइंस बिछाना अपेक्षाकृत सस्ता होता है, लेकिन उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना या निष्क्रिय करना बेहद महंगा होता है। जब तक पूरा समुद्री मार्ग साफ नहीं हो जाता, तब तक बीमा कंपनियां जहाजों के संचालन की अनुमति नहीं देंगी।मरीन माइंस हटाने के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है। इसके लिए माइंसवीपर जहाजों का उपयोग किया जाता है, जो खास तौर पर इस काम के लिए बनाए जाते हैं और इनमें लोहे का उपयोग नहीं होता।ये जहाज लकड़ी और फाइबरग्लास से बने होते हैं, जिससे वे मैग्नेटिक माइंस के प्रभाव से बचते हैं। इनके पीछे विशेष तार या जाल लगाया जाता है, जो माइंस से जुड़े तारों या जंजीरों को काट देता है। इससे माइंस सतह पर आ जाती हैं, जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया जाता है या निष्क्रिय करके किनारे लाया जाता है।इसके अलावा, एकास्टिक और मैग्नेटिक सिमुलेशन का भी उपयोग होता है, जिसमें उपकरणों के जरिए जहाज जैसी आवाज या मैग्नेटिक फील्ड पैदा की जाती है, जिससे माइंस भ्रमित होकर खुद ही फट जाती हैं।आजकल अंडरवाटर रोबोट्स और ड्रोन का भी उपयोग बढ़ रहा है। ये रोबोट सानार की मदद से माइंस का पता लगाते हैं और उनके पास जाकर छोटे विस्फोटक लगाते हैं, जिन्हें रिमोट से ब्लास्ट कर माइंस नष्ट कर दी जाती हैं।एक रोचक तथ्य यह भी है कि कुछ देशों की नौसेनाएं डाल्फिन और सी-लाय॔स को भी प्रशिक्षित करती हैं। ये समुद्री जीव सानार तरंगों को पहचान सकते हैं और माइंस के पास जाकर मार्कर लगा देते हैं, जिसके बाद गोताखोर उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं।