धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर एक बार फिर अपनी अद्वितीय परंपरा के लिए चर्चा में है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित हनुमान जी के इस आंगन में आज 6 अप्रैल से संगीत का महाकुंभ होने जा रहा है। समारोह 6 दिनों तक चलेगा और इसमें कुल 45 प्रस्तुतियां होंगी, जिसमें करीब डेढ़ सौ कलाकार अपने संगीत कला का प्रदर्शन करेंगे, इसमें 11 पद्म सम्मानित कलाकार भी रहेंगे।पिछले 102 साल से देश भर के प्रसिद्ध कलाकार वाराणसी संकट मोचन हनुमान मंदिर के प्रांगण में हनुमान जी के समक्ष अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बार आयोजन का 103 वां संस्करण होगा। 6 अप्रैल से 6 दिनों तक संगीत का यह कार्यक्रम प्रतिदिन सायंकालीन आरती के बाद शुरू होकर सुबह तक चलेगा। चित्रकूट नृत्य नटिका से समारोह का शुभारंभ होगा। इसको रूपवाणी संस्था के कलाकार प्रस्तुत करेंगे। यहां आयोजित होने वाला यह वार्षिक संगीत समारोह देश-विदेश के संगीत प्रेमियों और कलाकारों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति और शास्त्रीय संगीत का अनूठा मेल है।read more:https://khabarentertainment.in/farmers-sweat-and-holi-colors-become-symbols-of-prosperity-gratitude-expressed-at-the-get-together/ मंदिर परिसर में देर रात से लेकर भोर तक चलने वाले इस आयोजन में शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। विशेष बात यह है कि यहां कलाकार अपनी कला को भगवान हनुमान के चरणों में समर्पित भाव से प्रस्तुत करते हैं, न कि व्यावसायिक उद्देश्य से।समारोह में हर वर्ष देश के नामचीन कलाकार शिरकत करते हैं। पूर्व में पंडित भीमसेन जोशी, पंडित रवि शंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे महान कलाकार भी यहां अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। आज भी युवा और वरिष्ठ कलाकार इस मंच को अपने लिए सौभाग्य मानते हैं। समारोह की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी रात चलता है। श्रद्धालु और संगीत प्रेमी जमीन पर बैठकर घंटों तक रागों की मधुर धारा में डूबे रहते हैं। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण इस अनुभव को और भी दिव्य बना देता है।आयोजन समिति द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि कार्यक्रम की पवित्रता और अनुशासन बना रहे। यहां किसी प्रकार की ताली या शोर-शराबा नहीं होता, बल्कि श्रोताओं का मौन और ध्यान ही कलाकारों के प्रति सम्मान दर्शाता है। समय के साथ संकट मोचन संगीत समारोह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। विदेशी कलाकार और पर्यटक भी इस आयोजन का हिस्सा बनने के लिए वाराणसी पहुंचते हैं। यह समारोह भारतीय शास्त्रीय संगीत की जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जहां भक्ति, संस्कृति और कला एक साथ मिलकर अद्वितीय अनुभव प्रस्तुत करते हैं।read more:https://khabarentertainment.in/143-beneficiaries-in-barhalganj-received-the-benefit-of-the-pm-housing-scheme/ आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का स्थान भी बना हुआ है। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो भगवान हनुमान के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। इस मंदिर की स्थापना महान संत गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। कहा जाता है कि उन्हें इसी स्थान पर हनुमान जी के दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने यहां मंदिर की स्थापना की। तभी से यह स्थान “संकट मोचन” यानी संकटों को दूर करने वाले भगवान का धाम माना जाता है। मंदिर में प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान हनुमान जयंती पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त मंदिर परिसर से ही लड्डू, पेड़ा, चना, बूंदी आदि लेकर प्रसाद चढ़ाते हैं, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।हाल के वर्षों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया है। सीसीटीवी निगरानी, पुलिस बल की तैनाती और कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। यह मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। प्लास्टिक के उपयोग पर रोक और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। संकट मोचन हनुमान मंदिर आज भी श्रद्धा, विश्वास और संस्कृति का प्रतीक बना हुआ है। आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए यह मंदिर वाराणसी की पहचान को और भी समृद्ध कर रहा है।कहा जाता है कि वाराणसी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा हनुमान जी के कुल 5 प्रमुख विग्रह (मूर्तियाँ) स्थापित किए गए थे। ये स्थान आज भी वाराणसी में अत्यंत श्रद्धा और धार्मिक महत्व रखते हैं। इनमें संकट मोचन हनुमान मंदिर के साथ हनुमान घाट, तुलसी घाट, अस्सी घाट व लाट भैरव क्षेत्र में मंदिर स्थित है। इन सभी विग्रहों को “संकट निवारण” माना जाता है। तुलसीदास जी ने काशी में रामभक्ति और हनुमान उपासना को मजबूत करने के लिए इन स्थानों पर हनुमान जी के विग्रह की स्थापना की थी। तुलसी घाट को तुलसीदास जी की साधना स्थली मानी जाती है।