वीरेंद्र बहादुर सिंह
देशभर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्च महीने में जिस तरह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम बदला था और मावठा हुआ था, उसी तरह अप्रैल में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भारतीय मौसम में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पिछले दो दिनों में देश के कई राज्यों में बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी जैसी घटनाएं दर्ज की गई हैं। राजस्थान, दिल्ली और पंजाब में धूल भरी आंधियों के भी समाचार मिले हैं। दूसरी ओर दिल्ली और पंजाब सहित 11 राज्यों में दो दिन के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। गुजरात में भी अहमदाबाद सहित कई जिलों में बेमौसम बारिश हुई है।अप्रैल महीने में मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने लोगों में चिंता पैदा कर दी है।मौसम विभाग के अनुसार इस समय एक प्री-मानसून वेदर सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। 8 अप्रैल तक उत्तर भारत में दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस टकरा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बादलों की एक लंबी पट्टी, जो उत्तरी अफगानिस्तान से अरब सागर तक फैली है, उसके कारण पंजाब से गुजरात और महाराष्ट्र तक बारिश का माहौल बना है। हिमालयी राज्यों में भी बर्फबारी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में 5 अप्रैल तथा 7-8 अप्रैल, 2026 के बीच दो बार अत्यधिक मौसम गतिविधि होगी। इस दौरान उत्तर और मध्य राजस्थान, दिल्ली और उत्तर मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। 4-5 अप्रैल को गतिविधि थोड़ी कम होगी, लेकिन 7-8 अप्रैल को फिर तेज हो जाएगी। तमिलनाडु में भी बिजली गिरने की संभावना है। गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।read more:https://pahaltoday.com/sparrow-the-bird-of-the-courtyard-the-sensibility-of-nature-special-article-on-world-sparrow-day-march-20/ उल्लेखनीय है कि राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में ओलावृष्टि हुई। अजमेर-ब्यावर में तूफान के कारण कई पेड़ गिर गए और टीन की छतें उड़ गईं। आने वाले तीन दिनों तक राजस्थान में ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में तूफान के साथ बारिश और लाहौल-स्पीति तथा केदारनाथ में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है।महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत से लगभग 5,000 किमी दूर बना वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ईरान के रास्ते गुजरात तक पहुंचा है। जिस तरह ईरान में चल रहे युद्ध का असर भारत पर देखा गया, उसी तरह ईरान के पास बना यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी भारत को प्रभावित कर रहा है। गुजरात सहित पूरे देश में यह बेमौसम और तेज़ बारिश का कारण बना है। यह प्रणाली काला सागर और कैस्पियन सागर के पास भूमध्य सागर क्षेत्र में बनती है, जो गुजरात से 4,000 से 5,500 किमी दूर है। यह मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिम भारत और फिर गुजरात तक पहुंचती है। कुल 9,000 किमी की यात्रा के दौरान यह जमीन और समुद्र से नमी लेकर आगे बढ़ती है। ऊपरी वायुमंडल में बनने वाली यह प्रणाली ‘जेट स्ट्रीम’ के कारण तेज़ी से आगे बढ़ती है। जेट स्ट्रीम जमीन से 9 से 16 किमी की ऊंचाई पर 200 से 300 किमी प्रति घंटा की गति से बहती है, जिससे नमी तेज हवाओं के साथ आगे बढ़ती है और भारी बारिश होती है।read more:https://pahaltoday.com/second-divine-power-of-navratri-mata-brahmacharini/#google_vignette हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे में भी भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए। आमतौर पर इस समय सूखा मौसम रहता है, लेकिन अभी प्री-मानसून जैसी स्थिति बन गई है।विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में आया यह बदलाव क्लाइमेट चेंज का परिणाम है। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण मौसम और अधिक अस्थिर होता जा रहा है।आम तौर पर अरब सागर से पश्चिम भारत की ओर बढ़ने वाली कम दबाव की रेखा समुद्र से नमी खींचकर लाती है और वातावरण को बदल देती है। यही कारण है कि पुणे जैसे अंदरूनी क्षेत्रों में भी अचानक बादल बनते हैं और तेज़ बारिश होती है।हाल में पुणे में 15-20 मिनट की बारिश में ही शहर जलमग्न हो गया। शाम तक 66 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1896 के बाद अप्रैल महीने में एक दिन में सबसे अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार दिन की गर्मी और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के मेल से कनेक्टिव थंडरस्टॉर्म की स्थिति बनती है। गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है और ठंडी होकर बड़े क्यूम्यलोनिंबस बादलों में बदल जाती है, जो कम समय में भारी बारिश करते हैं। यही अस्थिरता जेट स्ट्रीम को भी प्रभावित करती है और तूफान को अधिक तीव्र बना देती है।माना जा रहा है कि आने वाले सप्ताह में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में फिर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।क्लाइमेट चेंज के कारण भारत का ऋतुचक्र बदल रहा है। अब गर्मियों में भी तेज बारिश हो रही है और मानसून के अलावा भी बेमौसम बारिश आम होती जा रही है।दिल्ली, एनसीआर और राजस्थान में धूल और स्मॉग की स्थिति बनी हुई है। तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश से तापमान में कमी आई, लेकिन दृश्यता घट गई।विशेषज्ञों के अनुसार पोलर जेट स्ट्रीम में बदलाव और पोलर वॉर्टेक्स की स्थिति के कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की संख्या बढ़ रही है। मार्च में 8 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आए, जबकि सामान्य संख्या 4-5 होती है। अप्रैल के मध्य तक 3 और सिस्टम बनने की संभावना है।राजस्थान के थार मरुस्थल में तेज हवाओं के कारण धूल उड़कर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पहुंच रही है, जिससे प्रदूषण (PM10) बढ़ रहा है। एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण धूल वातावरण में बनी रहती है और बारिश के बिना साफ नहीं होती।विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण आने वाले दिनों में मौसम में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।