युद्ध रोकने में पाकिस्तान की मध्यस्थता को साल का सबसे बड़ा मजाक माना गया

वीरेंद्र बहादुर सिंह –अफगानिस्तान के कभी भी हमला कर देने के डर के बीच जी रहा पाकिस्तान वैश्विक मंच पर सक्रिय बनने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की इच्छा रखने वाले पाकिस्तान को यह समझ नहीं है कि युद्धरत दोनों देश अमेरिका और ईरान उस पर भरोसा नहीं करते। ईरान के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी देश के साथ मध्यस्थता को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है। इसके बाद झेंप मिटाने के लिए पाकिस्तान ने कहा कि उसने तो केवल प्रस्ताव रखा था।पाकिस्तान अपनी छवि सुधारने के अवसर तलाशता रहता है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती। उसके शासक मानते हैं कि भले ही भारत मध्यस्थता न करे, लेकिन पाकिस्तान कर सकता है।अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की बात को विदेशी मीडिया ने ‘जोक ऑफ द ईयर’ (साल का सबसे बड़ा मजाक) करार दिया है। पाकिस्तान की यह कोशिश दरअसल वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की है। हकीकत यह है कि अमेरिका युद्धविराम के लिए किसी देश को मोहरा बनाना चाहता है और पाकिस्तान की यह सक्रियता उसे एक अवसर दे सकती है।read more:https://worldtrustednews.in/meeting-of-the-consultative-committee-of-the-ministry-of-heavy-industries-chaired-by-union-minister-shri-h-d-kumaraswamy-held-in-new-parliament-house/रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए भारत से मध्यस्थता की बात जरूर उठी थी, लेकिन भारत की ओर से इसका कोई समर्थन नहीं मिला। पाकिस्तान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है और इसी कारण और उलझता जा रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की बात को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने लॉबिंग भी की, लेकिन ईरान ने इसे एक झटके में खारिज कर दिया और अमेरिका ने भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।युद्धरत देशों के बीच मध्यस्थता करना बेहद जोखिम भरा होता है। अगर स्थिति बिगड़ जाए तो बीच में पड़ने वाले की हालत खराब हो सकती है। जैसे दो बिल्लियों के झगड़े में बंदर दोनों को मूर्ख बनाता है, उसी तरह पाकिस्तान मध्यस्थता के नाम पर दोनों देशों से आर्थिक लाभ लेना चाहता है।यह उल्लेखनीय है कि दुनिया में शिया मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी ईरान में है और दूसरे स्थान पर पाकिस्तान है। दोनों देश परमाणु शक्ति से लैस हैं और पाकिस्तान खुद को न्यूक्लियर सुपरपावर मानता है।read more:https://worldtrustednews.in/meeting-of-the-consultative-committee-of-the-ministry-of-heavy-industries-chaired-by-union-minister-shri-h-d-kumaraswamy-held-in-new-parliament-house/ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दबाव में आए पाकिस्तान के सेना प्रमुख असिम मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से कई बार बातचीत कर संबंध सुधारने की कोशिश की। उन्होंने ट्रम्प से बात कर मध्यस्थता की पेशकश भी की।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार है। इस संदर्भ में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि भारत किसी की दलाली करने वाला देश नहीं है। उन्होंने संभावित युद्ध परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी दी।पाकिस्तान की मध्यस्थता की बेचैनी समझ में आती है। कर्ज में डूबा देश आंतरिक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। बलूचिस्तान की गतिविधियों ने उसकी नींद उड़ा रखी है, वहीं भारत ने भी स्पष्ट कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है।काबुल के अस्पताल पर बमबारी कर सैकड़ों लोगों की जान लेने के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को भी उकसाया है। देश में पेट्रोल-डीजल की कमी है और लोगों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए गए हैं। चारों ओर से घिरे पाकिस्तान की कोशिश है कि वह अमेरिका-ईरान संघर्ष में मध्यस्थ बनकर अपनी छवि सुधार सके।यह केवल प्रतिष्ठा की बात नहीं है, बल्कि अमेरिका से आर्थिक मदद पाने की भी कोशिश है। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही और युद्ध जारी है। अमेरिका के लिए पाकिस्तान एक मोहरे की तरह है, जिसे थोड़ी आर्थिक सहायता देकर अपने हित में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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